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हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Friday, 31 August 2018

सारागढ़ी की लड़ाई story in hindi

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आज हम एक ऐसी लड़ाई के बारे में बात करेंगे जो भारतीय इतिहास में कभी नहीं भुलाई जा सकती battle of saragarhi in hindi में अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म battle of saragarhi movie इसी इतिहास पर है कैसे 21 सिक्खों ने 10000 अफगानों को हराया movie sons of sardaar the battle of saragarhi अजय देवगन की फिल्म son of sardar का सिक्वल सारागढ़ी की एतिहासिक लड़ाई की कहानी पर ही आधारित होगा story in hindi और battle of saragarhi in hindi story या real life inspirational stories in hindi में read करें.



The battle of saragarhi :-

एतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई भारतीय इतिहास में सारागढ़ी की लड़ाई सबसे बड़ी लड़ाई मानी जाती है 
unesco ने इस लड़ाई को दुनिया की सबसे सबसे बेहतरीन 5 लड़ाइयों में शामिल किया है सारागढ़ी की ये कहानी आपको जल्द ही फ़िल्मी परदे पर देखने को मिलेगी.
सारागढ़ी हिंदुकुश पर्वतमाला में स्थित एक चोट गाँव है जो आज पाकिस्तान में है ब्रिटिश शाशन में 36 सिख रेजीमेंट सारागढ़ी चौकी पर तैनात थे अफ्गानिस्तान से लगने वाले इस इलाके पर कब्ज़ा बनाए रखने के लिए अंग्रेज सेना यहाँ तैनात की गई थी ये चौकी रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण थी जो गुलिस्तान और लाकहार्ट किले के बीच में स्थित एक पहाड़ी पर थी.


इस इलाके में अक्सर कब्जी को लेकर अफगानों और अंग्रेजों के बीच लगातार लड़ाइयाँ होती रहती थी.
ये चौकी उन दिनों किलो के बीच एक communication network का काम करती थी british intelligence उस समय स्थानीय कबीलायी विद्रोहियों की बगावत को भाप न सके.
11 september 1897 में आफ्रिदी और अफगानों ने हाथ मिला लिया 27 अगस्त से 11 सितम्बर 1897 के बीच इन विद्रोहियों ने असंगिठित रूप से किले पर दर्जनों हमले किये लेकिन वीर सीखो ने उनके सारे आक्रमण विफल कर दिए आखिर में 12 september 1897 को करीब 12 से 14 हजार दुश्मनों ने सारागढ़ी के सिग्नलिंग पोस्ट पर हमला कर दिया.
वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे इन किलों का महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था इस किले पर 36वें  रेजीमेंट के 21 जवान तैनात थे हमले की शुरुआत होते ही signal  incharge सरदार गुरमुख सिंह ने Lt.Col. जॉन होफ्टन ब्रिटिश को होलोग्राम पर हमले की सुचना दी लेकिन वो सेना भेजने में असमर्थ रहे अंग्रेज अधिकारी कर्नल जॉन होफ्टन ने तुरंत सिख सिपाहियों को किला छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा लेकिन इशर सिंह समेत तभी 21 शूरवीर सैनिकों ने किले को दुश्मन की हाथों में सोंप कर हार स्वीकार करने की बजाए कबीलायी पठानों से मुकाबला करने का फैसला किया और उस अंग्रेज  अधिकारी की बातों को नज़रंदाज़ कर दिया.


दुश्मनों ने इस तरीके से जाल बिछाया था की पास के किलो से मदद तक नहीं ली जा सकती थी बताया जाता है की अफगानों ने हमले के बाद इन सिपाहियों से पोस्ट खाली करके आत्मसमर्पण करने को कहा था लेकिन इन सिपाहियों ने सिख परम्पराओं को अपनाते हुए मरते दम तक दुश्मनों से लड़ने का फैसला किया इशर सिंह के नेत्रत्व में तैनात इन 20 जनों को पहले ही पता चल गया की 12000 अफगानों से जिंदा बचना नामुमकिन है फिर भी ये जवान लड़ाई में जुट गए लांस नायक, लाभ सिंह और भगवान सिंह ने अपनी रायफल उठा ली और दुश्मनों को गोलियों से भूनते हुए आगे बड़े हजारों की संख्या में आए अफगानी पठानों की गोली का पहला शिकार बने भगवान सिंह जो की मुख्य द्वार पर सुख्मानो को रोक रहे थे उधर सीखो के होसलों से पठानों की कैंप में हडकंप मच गया था उन्हें ऐसा लगा की किले के अन्दर अभी भी कोई बड़ी सेना मौजूद है उन्होंने किले पर कब्ज़ा करने के लिए दो बार उसकी दीवार तोड़ने की कोशिश भी की लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके हवलदार इशर सिंह ने नेतृत्व सम्भालते हुए अपनी टोली के साथ "जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल"  लगाया और दुश्मनों से जमकर लड़ाई लड़ी उन्होंने बिना हथियार के ही 20 से अधिक अफगानों को मौत के घाट उतार दिया
एक-एक करके वीर सिपाही कम होते जा रहे थे लेकिन उनके हौसलों में कोई कमी नही आई थी गुरमुख सिंह ने अंग्रेज अधिकारी से कहा की हम भले ही संख्या में कम होते जा रहे है लेकिन जब तक हमारे शरीर में खून का एक भी कतरा रहेगा तब तक हम लड़ेंगे इतना कहकर वे भी जंग में कूद पड़े वीर सपूतों ने मौर्चा संभाल रखा था और दुश्मनों पर भरी पड़ रहे थे गोली बारूद खत्म होने पर उन्होंने हाथो और संगीनों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और लड़ाई लड़ते-लड़ते सुबह से रात हो गई और आखिरकार 20 वीर सिपाही शहीद हो गए.
सारागढ़ी पर बचे आखरी सिपाही गुरमुख सिंह ने सिग्नल टावर के अन्दर से लड़ते हुए 20 अफगानों को मार गिराया जब अफगान गुरमुख सिंह पर काबू नहीं कर पाए तो उन्होंने टावर में आग लगा दी और गुरमुख जिंदा ही जल कर शहीद हो गए जी ते जी उन्होंने दुश्मनों के आगे अपना सर नहीं झुकाया बताया जाता है की शहीद होने वालो में से एक सिख रसोइया भी था जो अपनी अंतिम सांस तक दुश्मनों से लोहा लेता रहा था आखिरकार अफगानों ने सारागढ़ी पर कब्ज़ा तो किया लेकिन अफगानियों को इस लड़ाई में भारी नुकसान सहना पड़ा लड़ाई लड़ते-लड़ते वे पूरी तरह से  थक गए थे और तय रणनीति से भटक गए.
अगले दिन आए अंग्रेजो की दस्ते ने अफगानों को हराकर फिर से सारागढ़ी पर कब्ज़ा कर लिया अंग्रेजो के फिर से कब्जे के बाद सिख सैनिको की बहादुरी दुनिया के सामने आई अंग्रेज सैनिकों को वहां अफगानों की एक हज़ार की आस-पास लाशें मिली 12 september 1897 को सिख लैंड की धरती पर हुआ यह युद्ध दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ गिनी गई.


जब ये खबर यूरोप पहुंची तो पूरी दुनिया चकित रह गई ब्रिटेन की संसद में सभी ने खड़े होकर इन 21 वीरों की बहादुरी को सलाम किया इन सभी को मरणोपरांत इंडियन आर्डर ऑफ़ मेरिट दिया गया जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था बाद मे लड़ाई के इस मार्ग रूप में अंग्रेजो ने अमृतसर, फिरोजपुर और वज्रिस्तान में 3 गुरूद्वारे बनवाए.
ब्रिटेन में आज भी सारागढ़ी की जंग को शान से याद किया जाता है इतिहास कारों के मुताबिक पाकिस्तान की नॉर्थ फ्रंटियर पोस्ट के जिला कोहार में करीब 6000 फ़ीट ऊँची पहाड़ीयों पर सारागढ़ी नाम का छोटा सा किला आज भी मौजूद है.
मौजूदा समय में पाकिस्तानी सेना द्वारा सिग्नल स्टेशन के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है भारतीय सेना की आधुनिक सिख रेजीमेंट 12 september को हर साल सारागढ़ी दिवस मानाती  है यह दिन उत्सव का होता है जिसमे सारागढ़ी के शूरवीरों  की पराक्रम और बलिदान के सम्मान में जश्न मनाया जाता है.
2012 में आई अजय देवगन की फिल्म son of sardar का सिक्वल सारागढ़ी की एतिहासिक लड़ाई की कहानी पर ही आधारित होगा साथ ही राज कुमार संतोषी भी इसी कहानी पर the battle of saragarhi नाम से फिल्म बना रहे है.
सारागढ़ी की पढाई यूरोप के सभी स्कूल में पढाई जाती है लेकिन हमारे दश में इसे जानते तक नहीं आपने greek sparta and persian war के बारे में तो सुना ही होगा जिसके ऊपर three hundred जैसी movie भी बन चुकी है इस लड़ाई के आगे spartans की लड़ाई भी फीकी पड़ जाती है पर बहुत ही अफ़सोस होता है की जो बात हम भारतियों को पता होनी चाहिए उसके बारे में हम जानते तक नहीं बेखबर है और इसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते है.

manikarnika the queen of jhansi- rani of jhansi
dr. bhim rao ambedkar - story 
rajat sharma  -  real life inspirational stories in hindi


Tuesday, 28 August 2018

मणिकर्णिका rani of jhansi

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बहादुरी, देशभक्ति और सम्मान की प्रतीक jhansi ki rani laxmi bai और jhansi ki rani story को हिंदी में पढ़े और jhansi ki rani history या फिर rani laxmi bai information और gangadhar rao के बारे में भी बताया गया है और आप इस post में  jhansi ki rani poem  की poem को भी read कर सकते है .



झाँसी की रानी:-


रानी लक्ष्मी बाई के बारे में तथ्य और जानकारी

 जन्म                                                मणिकर्णिका तांबे, 19 नवंबर 1828
 जन्म स्थान                                        वाराणसी, भारत
 राष्ट्रीयता भारतीय
 पिता                                                मोरोपंत तांबे
 माता                                                भागीरथी
 मृत्यु                                               18 जून 1858 (29 वर्ष), भारत के ग्वालियर के पास कोटा के सराय में
                                                             पति झांसी नरेश महाराजा गंगाधर रावनेवालकर
 संतान                                               उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया, जिसकी चार महीने की उम्र में                                                                       मृत्यु हो गयी, उसके बाद 1851 में दामोदर राव को गोद लिया,
 शिक्षा                                               उन्होंने अपनी शिक्षा घर पर प्राप्त की थी और अपने उम्र के अन्य                                                                    लोगों से अधिक आत्मनिर्भर थी; उनके अध्ययन में निशानेबाजी,                                                                     घुड़सवारी और तलवारवाजी शामिल थी।
योगदान के रूप में जाना जाता है         लक्ष्मीबाई
 पुरस्कार और सम्मान                         हिंदुओं की देवी लक्ष्मी का सम्मान


हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए बहुत से राजाओं ने लड़ाइयाँ लड़ी और इस कोशिश में हमारे देश की वीर तथा साहसी स्त्रियों ने भी उनका साथ दिया इन वीरांगनाओ में रानी दुर्गावती रानी, लक्ष्मीबाई आदि का नाम शामिल है.

रानी लक्ष्मीबाई का पूरा नाम है मणिकर्णिका तांबे शादी के बाद इनका नाम लक्ष्मीबाई हो गया था.  इनका जन्म सन 19 नवम्बर 1828 को हुआ था इनकी म्रत्यु सन 18 जून 1858 में हो गई थी इनके पिता का नाम है मोरोपंत तांबे इनकी माता का नाम था भागीरथी सापरे इनके पति झाँसी नरेश महाराज गंगाधर राव नेवालकर थे इनकी संतान दामोदर राव (आनंद राव) इनका घराना मराठा साम्राज्य उल्लेखनीय कार्य सन 1857 का स्वतंत्रता संग्राम


महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म एक महाराष्ट्रियन ब्राह्मण परिवार में सन 1828 में काशी में हुआ उनके पिता मोरोपंत तांबे बिठुर में न्यायालय में पेशवा थे और इसी कारण वे इस काम में प्रभावित थी और उन्हें अन्य लड़कियों की अपेक्षा अधिक स्वतंत्रता भी प्राप्त थी उनकी शिक्षा-दीक्षा में पढाई के साथ-साथ आत्मरक्षा घुड़सवारी, निशानेबाजी और घेराबन्धी का प्रक्षिशन भी शामिल था उन्होंने अपनी सेना भी तयार की थी उनकी माता भागीरथी बाई ग्रेह्नी थी उनका नाम बचपन में  मणिकर्णिका रखा गया और परिवार के सदस्य उन्हें प्यार से मनु कहकर पुकारते थे जब वे 4 साल की थी तभी उनकी माता का देहांत हो गया था और उनके पालन-पोषण की साड़ी जिम्मेदारी उनके पिता पर आ गई थी रानीलक्ष्मीबाई में अनेक विशेषताएँ थी जैसे:- नियमित योगा अभ्यास करना, धार्मिक कार्यों में रुचि .................... उहे घोड़ो की अच्छी परख थी रानी लक्ष्मीबाई अपने प्रजा का बहुत अच्छे से ख्याल रखती थी गुन्हेगारों को उचित सजा देने की भी हिम्मत रखती थी रानी लक्ष्मीबाई की शादी सन 1842 में उनका विवाह उत्तर भारत में स्थित झाँसी राज्य के महाराज गंगाधर राव नेवालकर के साथ हो गया तब वह झाँसी की रानी बनी उस समय वह मात्र 14 साल की थी विवाह के पश्चात ही उन्हें लक्ष्मीबाई नाम मिला उनका विवाह प्राचीन झाँसी में सिद्ध गणेश मंदिर में हुआ था सन 1891 में उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया जिसका नाम दामोदर राव रखा गया परन्तु दुर्भाग्य वश वह 4 महीने ही जीवित रह सका ऐसा कहा जाता है की महाराज  गंगाधर राव नेवालकर अपने पुत्र की म्रत्यु से कभी उभर ही नहीं पाए और सन 1853 में महाराज बहुत ही बीमार पड़ गए तब उन दोनों ने मिलकर अपने रिश्तेदार महाराज गंगाधर राव के भाई के पुत्र को गोद लिया इस प्रकार गोद लिए गए पुत्र के उत्तराधिकारी पर ब्रिटिश सरकार कोई आपत्ति ना ले इसलिए वह कार्य ब्रिटिश अफसरों की उपस्थिति में पूर्ण किया गया इस बालक का नाम आनंद राव था जिसे बाद में बदलकर दामोदर राव रखा गया रानी लक्ष्मीबाई का उत्तराधिकारी बनना 21 नवम्बर सन 1853 में महाराज गंगाधर राव नेवालकर की म्रत्यु हो गई उस समय रानी की आयु मात्र ही 18 वर्ष की थी लेकिन रानी ने अपना धैर्य और साहस नहीं खोया और बालक दामोदर की आयु कम होने के कारण राज्य काज का उत्तरदाय्तव  महारानी लक्ष्मीबाई ने स्वयं पर ले लिया उस समय लार्ड डलहौज़ी गवर्नर थे और उस समय ये नियम था की शाशन पर उत्तराधिकारी तभी होगा जब राजा का स्वयं का पुत्र हो यदि पुत्र ना हो तो उसका राज्य East India Company में मिल जाएगा और राज्य परिवार को अपने  खर्चे हेतु पेंशन  दी जाएगी उसने महाराज की म्रत्यु का फ़ायदा उठाने की कोशिश की वह झाँसी को ब्रिटिश राज्य में मिलाना चाहता था उसका कहना था की महाराज गंगाधर राव नेवालकर और महारानी लक्ष्मीबाई की अपनी कोई संतान नहीं है और उसे इस प्रकार गोद लिए गए पुत्र को राज्य व उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया तब महारानी लक्ष्मीबाई ने london में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया पर वहां उनका मुकदमा ख़ारिज कर दिया गया साथ ही ये आदेश भी दिया गया की महारानी झाँसी के किले को खाली कर दे और स्वयं रानी महल में जाकर रहे इसके लिए उन्हें रूपए 60,000 की पेंशन दी जाएगी परन्तु रानी लक्ष्मीबाई अपनी झाँसी को ना देने फैसले पर अड़ी रही वह अपने झाँसी को सुरक्षित करना चाहती थी जिसके लिए उन्होंने सेना संगठन को प्रारम्भ किया.

संघर्ष की शुरुआत :-

7 मार्च 1854 को ब्रिटिश सरकार ने एक सरकारी गजट जारी किया जिसके अनुसार झाँसी को  ब्रिटिश साम्रराज्य में मिलने का आदेश दिया गया था रानी लक्ष्मीबाई को ब्रिटिश अफसर एलिस द्वारा ये आदेश मिलने पर उन्होंने इसे मानने से इनकार कर दिया और कहा मेरी झाँसी नहीं दूंगी अब झाँसी विद्रोह का केंद्र बिंदु बन गया रानी लक्ष्मीबाई ने कुछ अन्य राज्यों की मदद से एक सेना तयार की जिसमे केवल पुरुष ही नहीं अपितु महिलाएं भी शामिल थी जिन्हें युद्ध में लड़ने के लिए प्रक्षिशन भी दिया गया था उनकी सेना ने अनेक महारथी भी थे जैसे :- गुलाम गोस, दोस्त खान, खुदा बक्श, सुन्दर-मुन्दर काशीबाई, लाल भाऊ बक्षी, मोती बाई, दीवान रघुनाथ सिंह ओए दीवान जवाहर सिंह जैसे नाम शामिल थे. लगभग 14,000 सैनिक थे.


10 मई 1857 को मेरठ में भारतीय विद्रोह प्रारम्भ हुआ जिसका कारण था की जो बंदूकों की नइ गोलियां थी उस पर सुआर और गौ मॉस की परत चड़ी थी इससे हिन्दुओं की धर्मिक भावनाओं पर ठेस लगी थी और इस कारण ये विद्रोह देश भर में फ़ैल गया था इस विद्रोह को दबाना ब्रिटिश सरकार के लिए ज्यादा जरुरी था  अतः उन्होंने फिलहाल झांसी को रानी  लक्ष्मीबाई के अधीन छोड़ने का निर्णय लिया था इस दौरान सन सितम्बर-अक्टूबर 1857 में रानी लक्ष्मीबाई को अपने पड़ोसी देश को "ओरछा" और "दतिया" के राजाओं के साथ युद्ध करना पड़ा क्यूंकि उन्होंने झाँसी पर चढाई कर दी थी इसके कुछ समय बाद मार्च 1858 में अंग्रेजो ने झाँसी पर हमला कर दिया और तब झाँसी की ओर से तात्य टोपे के नेत्रत्व में 20,000 सैनिक के साथ ये लड़ाई लड़ी गई जो लगभग 2 सप्ताह तक चली अंग्रेजी सेना की दीवारों को तोड़ने में सफल रही और नगर पर कब्ज़ा कर लिया इस समय अंग्रेज सरकार झांसी को हथियाने में कामयाब रही और अंग्रेजी सैनिको और लूट-पाट भी शुरू कर दी थी फिर भी रानी लक्ष्मीबाई किसी प्रकार अपने पुत्र दामोदर राव को बचाने में सफल रही.

कालपी की लड़ाई :-

हार जाने के कारण उन्होंने सत्त 24 घंटे में 102 मील तय किया और अपने डाल के साथ कालपी पहुंची और कुछ समय कालपी में शरण ली जहां वह  तात्य टोपे के साथ थीं तब वहां के पेशवा ने परिस्थिति को समझकर उन्हें शरण दी और अपना सैन्य बल भी प्रदान किया 22 मई 1858  को सर ह्यूरोज ने कालपी पर आक्रमण कर दिया था तब रानी लक्ष्मीबाई ने वीरता और रणनीति पूर्वक उन्हें परास्त किया और अंग्रेजों को पीछे हटना पड़ा कुछ समय पश्चात  का हार जाने के कारण सर ह्यूरोज ने कालपी पर फिर से हमला किया और इस बार रानी को हार का सामना करना पड़ा युद्ध में हारने के पश्चात राव साहेब पेशवा बंदा के नवाब तात्य टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, और अन्य मुख्य योद्धा गोपाल नूर एक मात्र हुए रानी ने ग्वालियर पर अधिकार प्राप्त करने का सुझाव दिया ताकि वह अपने लक्ष्य में सफल हों सके वही रानी लक्ष्मीबाई और तात्य टोपे ने इस प्रकार गठित एक विद्रोही सेना के साथ मिलकर ग्वालियर पर चढाई कर दी वहाँ इन्होने ग्वालियर के महाराजा को परासित किया और रणनीतिक तरीके से ग्वालियर के जिले पर जीत हासिल की और ग्वालियर का राज्य पेशवा को शोंप दिया.


रानी लक्ष्मीबाई की म्रत्यु  :-

17 जून 1858 में किंग्स रॉयल आयरिश के खिलाफ युद्ध लड़ते समय उन्होंने ग्वालियर के पूर्व क्षेत्र का इस युद्ध में इनकी सेविकाएँ तक शामिल थीं और पुरुषों की पोषक धारण के साथ ही उतनी ही वीरता से युद्ध भी कर रहीं थी इस युद्ध के दौरान वे अपने राज-रतन नामक घोड़े पर सवार नहीं थी और ये घोड़ा नया था जो नहर के उस पार नहीं कूद पा रहा था रानी स्थिति को समझ गई और वीरता के साथ यहीं युद्ध करती रहीं इस समय वह पूरी तरह से घायल हो चुकीं थी और वह घोड़े पर से गिर पड़ी क्यूंकि वह पुरुष पोशाक में थी अतः उन्हें अंग्रेजी सैनिक पहचान नहीं पाए और उन्हें छोड़ दिया तब रानी के विश्वाश पात्र सैनिक उन्हें पास की गंगादास मठ में ले गए और उन्हें गंगाजल दिया तब उन्होंने अपनी अंतिम इच्छा बताई की कोई भी फिरंगी उनकी म्रत्यु को हाथ ना लगाए इसीलिए उन्होंने एक संत को कहा था की उनका डाह संस्कार कर दे. 17 जून 185 8 को उनका देहांत हो गया.


उनकी इच्छा के अनुसार उनके शव का दाह संस्कार 18 जून 1858 को किया गया इस प्रकार कोटा की सराई के पास ग्वालियर के फूल बाग़ क्षेत्र में उन्हें वीर गति प्राप्त हुई अर्थात वह म्रत्यु को प्राप्त हुई ब्रिटिश सरकार ने 3 दिन बाद ग्वालियर को हथिया लिया उनके म्रत्यु के पश्चात उनके पिता मोरोपंत तांबे को गिरफ्तार कर लिया और फांसी की सजा दी गई रानी लक्ष्मीबाई के पुत्र दामोदर राव को ब्रिटिश राज्य द्वारा पेंशन दी गई और उन्हें उनका उत्तराधिकारी कभी नहीं मिला बाद में राव इंदौर शहर में बस गए और उन्होंने अपने जीवन का बहुत समय अंग्रेज सरकार को मनाने एवं अपने अधिकारों को पुनः प्राप्त करने के प्रयासों में व्यतीत किया और उनकी म्रत्यु 28 मई 1906 को हो गई इस प्रकार देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए उन्होंने अपनी जान तक न्योछावर कर दी.
खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी.



झाँसी की रानी poem

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन छबीली थी,
लक्ष्मीबाई नाम, पिता की वह संतान अकेली थी,
नाना के सँग पढ़ती थी वह, नाना के सँग खेली थी,
बरछी ढाल, कृपाण, कटारी उसकी यही सहेली थी।
वीर शिवाजी की गाथायें उसकी याद ज़बानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार,
नकली युद्ध-व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,
सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवार।
महाराष्टर-कुल-देवी उसकी भी आराध्य भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएँ
हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आई लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छाई झाँसी में,
सुभट बुंदेलों की विरुदावलि सी वह आयी झांसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया, शिव से मिली भवानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

उदित हुआ सौभाग्य, मुदित महलों में उजियाली छाई,
किंतु कालगति चुपके-चुपके काली घटा घेर लाई,
तीर चलाने वाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई,
रानी विधवा हुई, हाय! विधि को भी नहीं दया आई।
निसंतान मरे राजाजी रानी शोक-समानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

बुझा दीप झाँसी का तब डलहौज़ी मन में हरषाया,
राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया,
फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया,
लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया।
अश्रुपूर्णा रानी ने देखा झाँसी हुई बिरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

अनुनय विनय नहीं सुनती है, विकट शासकों की माया,
व्यापारी बन दया चाहता था जब यह भारत आया,
डलहौज़ी ने पैर पसारे, अब तो पलट गई काया,
राजाओं नव्वाबों को भी उसने पैरों ठुकराया।
रानी दासी बनी, बनी यह दासी अब महरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

छिनी राजधानी दिल्ली की, लखनऊ छीना बातों-बात,
कैद पेशवा था बिठुर में, हुआ नागपुर का भी घात,
उदैपुर, तंजौर, सतारा, करनाटक की कौन बिसात?
जबकि सिंध, पंजाब ब्रह्म पर अभी हुआ था वज्र-निपात।
बंगाले, मद्रास आदि की भी तो वही कहानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी रोयीं रिनवासों में, बेगम ग़म से थीं बेज़ार,
उनके गहने कपड़े बिकते थे कलकत्ते के बाज़ार,
सरे आम नीलाम छापते थे अंग्रेज़ों के अखबार,
'नागपूर के ज़ेवर ले लो लखनऊ के लो नौलख हार'।
यों परदे की इज़्ज़त परदेशी के हाथ बिकानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

कुटियों में भी विषम वेदना, महलों में आहत अपमान,
वीर सैनिकों के मन में था अपने पुरखों का अभिमान,
नाना धुंधूपंत पेशवा जुटा रहा था सब सामान,
बहिन छबीली ने रण-चण्डी का कर दिया प्रकट आहवान।
हुआ यज्ञ प्रारम्भ उन्हें तो सोई ज्योति जगानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

सुभद्रा कुमारी चौहान की कविताएँ
महलों ने दी आग, झोंपड़ी ने ज्वाला सुलगाई थी,
यह स्वतंत्रता की चिनगारी अंतरतम से आई थी,
झाँसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाई थी,
मेरठ, कानपूर, पटना ने भारी धूम मचाई थी,
जबलपूर, कोल्हापूर में भी कुछ हलचल उकसानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इस स्वतंत्रता महायज्ञ में कई वीरवर आए काम,
नाना धुंधूपंत, ताँतिया, चतुर अज़ीमुल्ला सरनाम,
अहमदशाह मौलवी, ठाकुर कुँवरसिंह सैनिक अभिराम,
भारत के इतिहास गगन में अमर रहेंगे जिनके नाम।
लेकिन आज जुर्म कहलाती उनकी जो कुरबानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

इनकी गाथा छोड़, चले हम झाँसी के मैदानों में,
जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में,
लेफ्टिनेंट वाकर आ पहुँचा, आगे बड़ा जवानों में,
रानी ने तलवार खींच ली, हुया द्वन्द्ध असमानों में।
ज़ख्मी होकर वाकर भागा, उसे अजब हैरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी बढ़ी कालपी आई, कर सौ मील निरंतर पार,
घोड़ा थक कर गिरा भूमि पर गया स्वर्ग तत्काल सिधार,
यमुना तट पर अंग्रेज़ों ने फिर खाई रानी से हार,
विजयी रानी आगे चल दी, किया ग्वालियर पर अधिकार।
अंग्रेज़ों के मित्र सिंधिया ने छोड़ी रजधानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

विजय मिली, पर अंग्रेज़ों की फिर सेना घिर आई थी,
अबके जनरल स्मिथ सम्मुख था, उसने मुहँ की खाई थी,
काना और मंदरा सखियाँ रानी के संग आई थी,
युद्ध श्रेत्र में उन दोनों ने भारी मार मचाई थी।
पर पीछे ह्यूरोज़ आ गया, हाय! घिरी अब रानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

तो भी रानी मार काट कर चलती बनी सैन्य के पार,
किन्तु सामने नाला आया, था वह संकट विषम अपार,
घोड़ा अड़ा, नया घोड़ा था, इतने में आ गये अवार,
रानी एक, शत्रु बहुतेरे, होने लगे वार-पर-वार।
घायल होकर गिरी सिंहनी उसे वीर गति पानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

रानी गई सिधार चिता अब उसकी दिव्य सवारी थी,
मिला तेज से तेज, तेज की वह सच्ची अधिकारी थी,
अभी उम्र कुल तेइस की थी, मनुज नहीं अवतारी थी,
हमको जीवित करने आयी बन स्वतंत्रता-नारी थी,
दिखा गई पथ, सिखा गई हमको जो सीख सिखानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

जाओ रानी याद रखेंगे ये कृतज्ञ भारतवासी,
यह तेरा बलिदान जगावेगा स्वतंत्रता अविनासी,
होवे चुप इतिहास, लगे सच्चाई को चाहे फाँसी,
हो मदमाती विजय, मिटा दे गोलों से चाहे झाँसी।
तेरा स्मारक तू ही होगी, तू खुद अमिट निशानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
                                - सुभद्रा कुमारी चौहान


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Friday, 24 August 2018

Super 30 के सुपर हीरो आनंद कुमार motivational story in hindi

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जितनी रात अँधेरी हो रही है, उतने ही आप सवेरे के नजदीक पहुँच रहे हो केवल हिम्मत मत हारो, धैर्य बनाए रखो. जिसने इतना कुछ सहने के बाद भी हार नहीं मानी और आगे बढ़ते गए और आज पुरे देश में जाने जाते है जिनका नाम है anand kumar super 30 हौसला बढ़ाने वाली ये एक ऐसे real life inspirational stories in hindi में है और  inspirational stories for students और inspirational stories for teachers के लिए है इस post में आपको motivation in hindi में बताया गया है और इसके आलावा importance of teacher in students life in hindi में बताया गया है आप इस post से सीख ले सकते है.



सुपर 30 आनंद कुमार 



बुझी हुई समा फिर से जल सकती है,
भयंकर से भयंकर तूफान से कश्ती निकल सकती है;
निरास ना हो मायूस ना हो दोस्तों सिर्फ मेहनत करके देख किस्मत बदल सकती है.


हर वो बच्चा जो engineering करना चाहता है उसका एक सपना होता है iit में addmision लेने का लेकिन IIT के entrance exam इतने tough होते है की आजकल उसके लिए ही अलग से coaching और institute बन गए है और भाई इस coaching की fees ही इतनी ज्यादा होती है के जो हमारे गरीब बच्चे वो इन coaching में addmision ही नहीं ले पाते है ऐसे ही बच्चों के लिए एक फ़रिश्ता बनकर आए है ANAND KUMAR.
ANAND KUMAR "SUPER 30" नाम से एक coaching चलाते है तो आज हम इन्ही के बारे में जानेंगे की कैसे इन्होने अपनी journey start की.


ANAND KUMAR का जन्म 1 january 1973,PATNA (बिहार की राजधानी) में हुआ था उनके पिता एक post department में एक clerk थे और उनकी family की financial condition बहुत ही ख़राब थी इस वजह से उनके पिता उनकी private schooling afford नहीं कर सकते थे जिस वजह से ANAND को government स्कूल में पढ़ना पढ़ा और इस स्कूल में ANAND का interest mathematics में बहुत ज्यादा बढ़ गया था और अपनी gradution के time ANAND ने number theory पर कुछ ऐसे notes बनाए की उन्हें 'The Mathematical  Gazette' और 'Mathematical Spectrum' जैसी बड़ी किताबों में publish किया गया.
ANAND ने campbridge university में addmision भी secure कर लिया था पर अपनी financial condition की वजह से वो वहाँ पर जा ना सके और इसी दौरान एक दुर्घटना घटी और उनके पिता की death हो गई अब ANAND के उपर अपने परिवार की साड़ी जिम्मेदारी आ गई थी पर ANAND यहाँ पर टूटे नहीं और अपनी mathematics की पढाई जारी रक्खी और रात में वो अपनी माँ के साथ मिलकर पापड़ भी बेचते थे जिससे की उनके परिवार का पेट पलता था कुछ extra पैसे कमाने के लिए ANAND KUMAR बच्चों को tution देना भी start कर दिया था.
 ANAND को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था पर patna university में विदेशी किताबें ना होने की वजह से ANAND को हर हफ्ते बनारस जाना पड़ता था बनारस में उनके छोटे भाई violin सीख रहे थे वो उनके साथ hostel रूम में ही रुक जाते थे saturday और sunday को वो BHU के central library विदेशी authors की किताब पड़ते थे इसके बाद 1992 में ANAND ने  एक कमरा किराय पर लिया और उसमे ramanujan school of mathematics के नाम से अपना institute खोल लिया वहां पर वो बच्चों को mathematics की coaching देते थे 1 साल के अंदर-अंदर उनके पास 36 बच्चे हो गए थे इसी तरह धीरे-धीरे ANAND की coaching में बच्चे बढ़ते चले गए और लग-भग 3 साल में उनके पास 500 बच्चे हो गए थे तो इस तरह ANAND की ज़िन्दगी में सबकुछ फिरसे normal हो चूका था पर तभी साल 2009 में आनंद के पास एक बच्चा आया जो की अपनी गरीबी की वजह से IIT के entrance exams की तयारी नहीं कर सकता था और इस बच्चे से ANAND को SUPER 30 coaching खोलने का motivation मिला बाद में इसी SUPER 30 ने ANAND को पूरी दुनिया में famous कर दिया.


SUPER 30 coaching अब हम इसके बारे में जान लेते है SUPER 30 एक coaching institute है जो की गरीब बच्चो को free में IIT के entrance exam की तयारी करवाती है ये coaching हर साल may में एक competitive exam organise करवाती है और उसमे से 30 सबसे ज्यादा talented बच्चों को select किया जाता है और उन्हें free में IIT की coaching  दी जाती है इन बच्चो के लिए ANAND की माँ jayanti devi खाना पकातीं है और ANAND पढाई से related दुसरे काम देखते है और उन्हें 1 साल तक free में hostel में रहने के लिए सुविधा उपलब्ध करवाते है ANAND के भाई प्रणव इस coaching के management को देखते है.
2003-2017 तक ANAND के पढाए हुए 450 बच्चों में से 391 बच्चों का selection IIT में हुआ इसके आलावा इस साल यानि 2017 में ANAND के पढ़ाए हुए सभी 30 बच्चों का selection IIT में हुआ ANAND KUMAR के पास SUPER 30 के लिए किसी भी government या किसी भी private agencies से भी financial support नहीं है.

जब उनकी coaching famous होने लगी तो उनके पास कुछ sponsors भी आए पर वो एक एक करके सबको माना करते रहे उनक कहना है की वो अकेले के दम पर इस coaching को बहुत आगे ले जाना चाहते है इसी वजह से ramanujan institute और शाम की उनकी patna की classes से जितने भी पैसे मिलते है वो उसे SUPER 30 के लिए फण्ड के रूप में इस्तेमाल करते है.
ANAND की coaching कुछ माफिआओं से देखि नहीं गई इसी लिए उन पर एक जान लेवा हमला भी हुआ था पर कहते है न जिसके साथ भगवान् होता है ना उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता ANAND बाच गए और इस नेक काम में दुबारा से जुट गए 2010 में ANAND KUMAR के SUPER 30 को TIME MAGAZINE में asia के best institute में भी शामिल किया.


ANAND का नाम SUPER 30 जैसे नेक काम के लिए LIMCA BOOK OF RECORDS में भी दर्ज है इसके आलावा Indian government और बिहार government की तरफ से ANAND को कई awards भी मिल चुके है जिनमे Maulana azad award, Ramanujan award भी शामिल है ANAND के पास इतने awards है की उनके उपर अलग से ही एक किताब लिखी जा सकती है.
ANAND KUMAR के इस जूनून उनके एसे जज्बे को हम सलाम करते है.



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Thursday, 23 August 2018

डॉ.भीम राव ambedkar की सच्ची कहानी dr bhimrao ambedkar history in hindi

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 inspirational stories in Hindi for students और bravery stories in Hindi with moral इस पोस्ट का प्रमुख टॉपिक है .हमारी सफलता में हमारी मेहनत और सोच का बहुत बड़ा हाथ होता है किसी भी काम को करने के लिए जज्बा और जुनून होना चाहिए लगन से काम करेंगे आगे जरूर बड़ेंगे. ऐसे ही dr. bhimrao ambedkar history in hindi या dr. bhimrao ambedkar university इस story को read करें और जाने dr babasaheb ambedkar information या br ambedkar in hindi में read करें और आप इस story में b r ambedkar short biography read कर सकते है और आप उनकी पत्नी ramabai ambedkar या b. r. ambedkar education के बारे में भी जान सकते है.




bhim rao ambedkar in hindi

ये story एक महान व्यक्ति की है सन 1891 में रत्नगिरी नाम का स्थान महाराष्ट्र की वो भूमि जहां जन्म हुआ एक profound powerful दलित leader का एक ऐसे शक्ति शाली politician, women emancipator, एक economist, एक prolific writer, एक theorist एक ऐसे महान व्यक्ति Buddhism का revivalist भी था human rights profounder और eminent scholar और razor sharp intelligence.
जिनका नाम  Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar छोटी उम्र में ही ये रत्नागिरी  से सतारा नाम के स्थान महाराष्ट्र के पुणे के नजदीक है वहां शिफ्ट हो गए इनकी माता का देहांत हो गया था छोटी सी उम्र में ही बचपन से ही बड़ी दिल को देहेला देने वाली दुखी कर देने वाली एक बच्चे को आतंकित पीड़ित कर देने वाली तंग करने वाली परेशान करने वाली कठिनाइयों के दौर से ये गुजरे छोटे थे पढ़ना चाहते थे अपने पिता से बहुत request करते थे लेकिन क्यूंकि दलित समाज में एक महार जात में इनका जन्म हुआ तो इनको पढ़ने की कोई सुविधा नहीं  थी वहां के आम बच्चो के साथ इनको पढ़ने नहीं दिया जाता था और पिता ने इनको बड़ी किसी तरह जुगाड़ लगा के नजदीक के स्कूल में एडमिशन कराया तो उसको बैठने नहीं दिया गया बोले अलग बैठ के पढ़ेगा लेकिन उनकी पढाई में इतनी रूचि थी के अलग बैठ के भी इतना ध्यान से पढ़ते थे के मास्टर ने इनको एक बार बोला की इधर आओ और ये ब्लैकबोर्ड पे जो सवाल है इसे solve करके दिखाओ लेकिन जब सवाल solve करने ही गए थे की बच्चे चीखने लगे की मास्टर जी मास्टर जी........ ये नीची जाती का है और बच्चे चिल्लाके भागने भी लगे लेकिन ये हैरान हुए की बच्चे भाग क्यू रहे है ब्लैकबोर्ड की तरफ तभी देखा सारे बच्चो ने अपने-अपने टिफ़िन उठाए और पीछे करने लगे धक्का मरने लगे क्यूँ क्यूंकि उनको डर था की अगर इनकी परछाई भी अगर हमारे टिफ़िन में पड़ गई तो हमारा खाना अपवित्र हो जाएगा ऐसे ही कई चोंटे धक्के इनको लगे....


एक बार पानी क्या कुँए से पी लिया इतनी मार पड़ी और एक बार रिक्शे वाले ने रिक्शा से निचे उतार दिया बोला तू नही बैठेगा रिक्शे पे क्यूंकि रिक्शे वालो को बीच में पता चला की ये नीची जात का है और उससे बोला की तुझ से डबल पैसे लूँगा और अब रिक्शा भी तू ही चलाएगा क्यूंकि उस समय छूने से ही नहीं परछाई तक से दिक्कत थी आवाज से दिक्कत थी लोग सोचते थे की अपवित्र हो जाएंगे तो ये दर्द जो उनको सहना पड़ा यही दर्द इनकी जिंदगी में बहुत बड़ा role play किया आगे चलकर इनकी leadership को built करने में संस्कृत नहीं पढ़ाई जा रही थी बोलते है की संस्कृत तो ब्राह्मण के पढ़ने के लिए है तेरे पढ़ने के लिए नहीं.

स्कूल से निकाल दिया जाता था तो साया जी महाराज गैक्वाडा नाम के एक राजा हुआ करते थे जिन्होंने इसकी तकलीफ को समझा और वो इनकी तकलीफ को पहचानते थे और इनकी पढने की इतनी इच्छा को देख के उन्होंने इनको sponsor किया scholarship दी ताकि ये जाके west में लम्बी पढ़ाई कर सके और बात अब की नही है बात एक सौ दस साल पुरानी है 1908-09 उस समय सबसे निचले पायदान से उठा हुआ म्हार जात का लड़का जाकर के inter कर के आया इंग्लिश में Mumbai से उसके बाद वही से B.A. करी political science और economics में रुका नहीं तुम मुझे यहाँ नहीं पढने दोगे में जाऊँगा दुनिया के best university में रोक के तो  दिखाओ और वो ही scholarship लेकर नकल गए New York Columbia university में जाके पहले MA- political science, economics, history और sociology में और उसके बाद PhD करी और यही नहीं London school of economics चले गए और वहां जाके M.Sc किया उसके बाद law की पढाई की और उसके बाद भी Doctorate किया किताब के उपर अपनी thesis लिखी और ये वोही किताब थी  जिसके उपर आज जाकर के reserve bank of india को बनाया गया.
महाराजा और वड़ोदरा से प्रेम इतना था जो साया जी गैक्वाडा जिन्होंने इनको scholarship दिया पढ़ने में इनकी मदद करी थी दुनिया भर में पढ़ के उनका प्रेम भूले नही वापस उनके पास आ गऐ और बोले! दुनियाभर में पढ़ के आया हु आपकी सेवा में आना चाहता हूँ तो उनको military secretary की नौकरी मिली और उस समय ये नौकरी बहुत बड़ी मानी जाती थी अब ये बड़ी पद्वी पे तो आ गए थे लेकिन वो छुआछूत ने इनका पीछा थोड़ी न छोड़ा वहां भी जो सरकारी peon होता था वो उनको दूर से ही file फेंक के देता था बोला तू नीच जात का है ये नौकरी मिल गई तो क्या हुआ..... दूर से file फेकते थे उसके पास नहीं जाते थे और उनको खाने के लिए भी बोलते थे की बहार जाके खा और आज भी वो कुँए से पानी नहीं पी सकते थे तब भी यही condition थी.
बाबा साहेब की समस्या अभी कम थोड़ी ना हुई थी अभी तो जिनसे उनकी शादी हुई थी रमाबाई उनसे उनकी 5 संतान हुई लेकिन 4 बच्चे एक के बाद एक.. एक के बाद एक 4 बच्चों की मौत हो गई इलाज की सुविधा ठीक से  ना मिल पाने के कारण मौत हो गई 4 बच्चों की मौत हुई 1 बच्चा बचा लेकिन आगे चलकर पत्नी भी उनका ज्यादा साथ ना दे पाई उनकी भी लम्बी बीमारी के चलते उनका देहांत हो गया अब इस समय कोई भी आदमी टूट सकता था जिसका अपना स्वाभिमान ही खत्म हो जाए लेकिन बाबा साहेब ने क्या किया ये साथ-साथ अपने देश के लिए लड़ते रहे और घर की तकलीफों से अपने आप के घुटने टेक दिए सत्याग्रह पर निकल गए.
1927 के सत्याग्रह पे जिद्द पे अड़ गए सब दलितों को कुँए से पानी पीने का अधिकार दिला कर रहूँगा सार्वजानिक  स्थान है किसी का private नही है जो सरकारी स्थान है वहां पे एक इंसान दुसरे के साथ कुँए से पानी क्यूँ नहीं पी सकता और गलत तो हो रहा था साड़ी भी पहने तो पाँव को ढके नहीं उसे उठा के पहने तो उन्होंने अधिकार दिलाया के पूरी निचे तक आम ओरतों की तरह पाँव को ढक के साड़ी पहने का अधिकार दिलाया.
communal electorate की मांग करी ये चाहते थे की हमारी community की voting की सुविधा अलग हो लेकिन इसमें गाँधी जी हड़बड़ाए क्यूंकि वे जानते थे की अंग्रेज लोग  मिलके हमारे सारी जातियों को तोड़ के अलग कर देंगे तो गाँधी जी ने इनको समझाया बोले! ambedkar में आपको reservation दिला दूंगा  में आपकी बाकि सब मदद कर दूंगा लेकिन अलग नहीं करूँगा अब अगर जातियों के आधार पर देश को अलग किया तो मुझे स्वतंत्रता नहीं मिल पायगी में अंग्रेजो से लड़ नहीं पाऊंगा तो मेरे साथ खड़े होकर मेरी ताकत बनो तो जब ambedkar नहीं माने तो गाँधी जी ने request की और उसके बाद अनशन पे बैठ गाए तो ambedkar के सामने अब बड़ी दुविधा आ गई वो सोचे की एक तरफ  मेरी जाती के लोग में उनकी मदद करू और एक तरफ देश में आन्दोलन लड़ रहे गाँधी के  जीवन इनके जीवन का त्याग ना हो जाए कहीं इनका यही ना जीवन खत्म हो जाए तो वो बोले ठीक है आप अपना अनसन छोड़िये POONA PACT वहां sign. किया गया और जब POONA PACT sign. किया गया उस समय इन्होने reservation को कम से कम control में करलिया.
The Evaluation Of Provincial Finance In British India की एक किताब The Problem Of The Rupee नाम की ये  दो किताबें जिसके आधार पे RBI(RESERVE BANK OF INDIA) की स्थापना हुई.
तो अब आप imagine कर सकते है की भारत के सबसे निचले पाएदान से आया लड़का जिसकी कोई मदद करने वाला नही था आज उसकी बुद्धि पे आधारित हमारी  CONSTTUTION की स्थापना हुई इनकी ज्ञान(knowledge), बुद्धि(intelligence) और कौशल (skill) की वजह से indian leaders और british leaders दोनों मानते थे.
1947 में भारत आजाद हुआ और गाँधी जी के पास नेहरु जी cabinet की पूरी list लेकर आए जब नेहरु जी जो की  स्वतन्त्र भारत के पहले प्रधान मंत्री होने वाले थे पूरी cabinet की list लेकर पहुंचे और बताया की देखो इनको मेने... तभी गाँधी जी ने पूछा की बाबा साहेब ambedkar जी का नाम कहा है और वही थोड़ी उनकी बहस हुई और वहीँ गाँधी जी ने बोला की नेहरु ये तुम्हारी ही cabinet नही है ये आजाद भारत की cabinet है और तभी  बाबा साहेब को कानून मंत्री के रूप में लिया गया और यही नही बल्कि drafting committee थी indian constitution की  उसका chairman बना दिया गया और बाबासाहेब की intelligence के आगे कोई कुछ बोल नहीं सकता था तो जो इनसे सहमत थे और जो सहमत नही थे दोनों ही जानते थे की इस आदमी में बुद्धि बहुत है
इतने बुद्धिमान थे की आगे चलकर इन्होने हिन्दू कोड बिल और महिलाओं के लिए कानून के अन्दर कई बदलाव लाय ये वो political leader नही थे जो सत्ता के लिए लड़ते थे ये लड़ते थे उनके लिए की देश में कमजोर हिस्से को उठाना देश के हर leader की जिम्मेदारी है चाहे वो महिलाए हो चाहे वो जाती धर्म हो कमजोर हिस्से को आगे बड़ाना और support करना तभी देश आगे चलेगा खुशिहाली आएगी फ़ायदा सबका होगा.



इन्हें पढ़ना ना भूलें 




Wednesday, 22 August 2018

रेणुका आराध्य real life inspirational stories in hindi

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मुझे उम्मीद है की आप अपनी लाइफ में अच्छे होगे. लेकिन कई बार ऐसा होता है की हमें success मिलते-मिलते रह जाती है क्यूंकि हम give up कर देते है तो आज आपको एक एसे व्यक्ति के बारे में बताएगे जिसे read करके आपको कुछ टिप्स मिल सके अपने life में आगे बढ़ने के लिए. business success stories और successful businessman and their stories या success businessman story in hindi या फिर real life inspirational stories in hindi और story of successful person in hindi में read करें और अपनी लाइफ को success बनाए.



 रेणुका आराध्य 

कहानी जो आपकी ज़िन्दगी को सफल बनाने में मदद करेगी इस काहानी से आप बहुत कुछ सीख सकते है और अपनी life में आगे बढ़ सकते है.
"परेशानियों से भागना तो आसान होता है हर मुश्किल ज़िन्दगी में एक इम्तिहान होता है हिम्मत हारने वालों को कुछ नहीं मिलता मुश्किलों से लड़ने वालों के क़दमों में भी सारा जहाँ होता है"
आज हम आपको एक ऐसी success story बताने जा रहे है जो अपनी लगन और मेहनत के बलबूते एक भीखारी से करोड़पति बन गया जहाँ कभी वो घर-घर जाकर भीख मांगा करता था और आज market में उसकी company का turnover 30 करोड़ रुपए है और इनकी company की वजह से कई अन्य घरों का भी चूला जलता है और इनका नाम है रेणुका आराध्य और ये 50 वर्ष के हो चुके है.


इनकी शुरुआत बेंगलुरु के निकट अनेकल तलूक gopasandra गाँव से हुई रेणुका के पिता एक छोटे से स्थानीय मंदिर के एक पुजारी थे जो अपने परिवार की जीविका के लिए दान-पुन्य के पैसों से ही उनका घर चल पाता था इसलिए वे आस-पास गाँव में जाकर भीख में अनाज मांगकर लाते थे फिर उसी अनाज को बाजार में बेच कर जो पैसे उन्हें मिलते उससे जैसे-तैसे अपने घरवालों का पालन पोषण करते  रेणुका भीख मांगने में अपने पिता की मदद करते तब परिवार की हालत इतनी खराब हो गई की 6th क्लास के बाद एक पुजारी होने के नाते रोज पूजा पाठ करने के बाद भी उन्हें कई घरों में जाकार नौकर की तरह काम करना पड़ता.
पिता ने जल्द ही रेणुका को Chikpet के आश्रम में डाल दिया जहां उन्हें वेद और संस्कृत की पढ़ाई करनी पड़ती थी और सिर्फ 2 वक्त ही भोजन मिलता एक सुबह 8 बजे और एक रात को 8 बजे जिससे वे भूखे ही रह जाते और पढाई पर ध्यान नहीं दे पाते पेट भरने के लिए वे पूजा, शादी वा समारोह में जाना चाहते थे जिसके लिए उन्हें अपने seniors के व्यक्तिगत कामों को करना पड़ता था परिणाम स्वरुप वो दसवीं कक्षा में fail हो गए.
उनके बड़े भाई के घर छोड़ देने से और पिता के देहांत के बाद अपनी माँ और बहन की ज़िम्मेदारीयां उनके कंधे पर आ गई पर उन्होंने ये दिखा दिया की मुसीबत की घड़ी में भी वह अपनी जिम्मेदारियों से भी मुह नहीं मोडेंगे और इसी के साथ वे निकल पड़े आजीविका कमाने की बहुत लम्बी लड़ाई जिसमे उन्हें कई मुसीबतों का सामना कर करवट ली जब उन्होंने सब कुछ  छोड़ कर एक ड्राईवर बनने का फैसला लिया पर उनके पास ड्राइविंग
सीखने के लिए भी पैसे नहीं थे इसीलिए उन्होंने कुछ उधार लेकर अपनी शादी की अंगूठी को गिरवी रख कर ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त कर लिया इसके बाद उन्हें लगा की अब सब कुछ ठीक हो जायगा पर किस्मत ने उन्हें एक और झटका दिया जब एक छोटे से गाड़ी के एक्सीडेंट की वजह से अपनी पहली ड्राइविंग की नौकरी से कुछ ही घंटो में हाथ धोना पड़ा पर एक टैक्सी operator ने उन्हें एक मौका और दिया और बदले में रेणुका ने बिना पैसे लिए इनके लिए गाड़ी चलाई ताकि वे खुद को साबित कर सकें.
वे दिन भर काम करते और रात भर गाड़ी चलाने का प्रयास करते और वे अपनी यात्रियों का हमेशा ख्याल रखते जिससे उन पर लोगों  का विश्वास जागता गया और ड्राईवर के रूप में उनकी मांग बढती गई उन्होंने ठान लिया था चाहे जो हो जाय में दिन भर security guard का काम नहीं करूँगा और एक अच्छा ड्राईवर बनकर रहूँगा.


यात्रियों के अलावा हॉस्पिटल से लाशों को उनके घर तक भी पहुंचाया करते थे ये कहते है की लाशों को उनके घर तक पहुंचाने और उसके तुरंत बाद यात्रियों को तीर्थ ले जाने में उनको बहुत बड़ी सीख मिली जीवन और मौत एक लम्बी यात्रा के दो छोर है और यदि आपको जीवन में सफल होना है तो किसी भी मौके को जानें ना दे इसके बाद पहले दो चार साल तक एक ट्रेवल company में काम करते रहे उसके बाद वे उस ट्रेवल company को छोड़ कर दूसरी ट्रेवल company में चले गए जहा उन्हें विदेशी  यत्रियों को घुमाने का मौका मिला विदेशी यात्री से डोलर में tip मिलती थी लगातार 4 सालों तक ऐसे ही tip  मिलते-मिलते और अपनी पत्नी की pf की मदद से उन्होंने कुछ और लोगो के साथ मिलकर 'सिटी सफारी' नाम की एक company खोल ली और आगे चलकर इसी company में वे मेनेजर भी बन गए.
शायद उनकी जगह अगर कोई और होता तो इतने में ही संतुष्ट हो जाता पर उन्होंने अपनी सीमाओं को परखने की ठान राखा था इसीलिए लोन पर उन्होंने एक 'Indica car' ली जिसके सिर्फ डेढ़ साल बाद ही एक और कार ले ली.
इन्ही कारों की मदद से 2 साल तक उन्होंने 'स्पॉट सिटी टैक्सी' में काम किया लेकिन उन्होंने सोचा ''अभी मेरी मंजिल दूर है और मुझे खुद की एक ट्रेवल/ट्रांसपोर्ट company बनानी है''
और भाई... किस्मत भी हिम्मत वालों का ही साथ देती है तो ऐसे ही कुछ रेणुका जी के साथ भी हुआ जब उन्हें पता चला कि 'इंडियन सिटी टैक्सी' बिकने वाली है. तो रेणुका ने सन 2006 में उस company को 6,50,000 रुपयों में खरीद ली, जिसके लिए उन्हें अपने सभी कारों को बेचना पड़ा और उन्होंने उस company का नाम बदलकर 'प्रवासी कैब्स' रख लिया. और उसके बाद वे सफलता की सीडी चढ़ते गए और उन्होंने इस फैसले के बारे में कहा ''मेने अपने जीवन का सबसे बड़ा जोखिम लिया, पर वही जोखिम आज मुझे कहाँ से कहाँ लेकर आ गया'' सबसे पहले 'अमेज़न इंडिया' ने प्रमोशन के लिए रेणुका की company को चुना. उसके बाद अपनी company को आगे बढाने में रेणुका ने जान लगा दि. धीरे-धीरे उनके और भी कई नामी-ग्रामी ग्राहक बन गए जैसे walmart, general motors,akamai etc... और उसके बाद उन्होंने क पीछे मुड़ कर नहीं देखा और सफलता की सीडी चढ़ते गए पर उन्होंने कभी सीखना बंद नहीं किया और उनकी company इतनी मजबूत हो गई की जहां कई और टैक्सी कंपनियाँ 'ola' और 'uber' के आने से बंद हो गई, और रेणुका की company फिर भी सफलता की ओर आगे बढ़ रही है आज उनकी company की 1000 से ज्यादा कारें चलती है.


और आज वो 3 startup के director है और 3 सालों में उनका 100 करोड़ के आंकड़े  को छूने की उम्मीद है, जिसके बाद वो IPO की ओर आगे बढ़ेंगे. कोन सोच सकता था की बचपन में घर-घर जाकर अनाज मांगने वाला लड़का जो 10 वीं कक्षा में fail हो गया था जिसके पास खुद का एक रूपए भी नही था आज वो 30 करोड़ का मालिक है.
हम आशा करते है की आपको भी ये story अच्छी लगी होगी और आपको इस story से मदद मिल पायगी अपनी लाइफ में अपनी मंजिल को पाने के लिए.

रजत शर्मा के बुलंद होसलों की कहानी inspirational stories in hindi

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अगर आप भी अपनी life में success होना चाहते है तो story of successful person in hindi या real life inspirational stories in hindi में पढ़े और कुछ सीख ले जिससे आपकी लाइफ में भी success हो success in hindi में भी पढ़ सकते है और inspirational stories in hindi for students या success story in hindi  में read करें और आगे अपनी life में बढ़े तरक्की  करें.




रजत शर्मा :-

''बेटा! किसी दुसरे के घर में किसी तीसरे को टीवी पे देखने जाते हो अगर दम है तो कुछ ऐसा करो की तुम टीवी पर जो लोग तुम्हे देखे''. 
यही वो line थी जिसे सुन के एक गरीब परिवार के बच्चे को टेलीविज़न का जाना माना चेहरा बना दिया ये जो बच्चा था वो है रजत शर्मा जिनका show AAP KI ADALAT कई सालों से बहुत फेमस है और इस show में उनका question पूछने का अंदाज कुछ ऐसा होता है की उनके हर सवाल का जवाब भी मिल जाय और कोई बुरा भी ना माने लेकिन इतना फेमस होने की वजह उनके शुरूआती जीवन के बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे.
जिन्होंने बहुत ही गरीबी में अपना जीवन बिताया एक छोटे से कमरे में अपने बड़ी सी family के साथ गुजारा किया और रेलवे स्टेशन की लाइट में उन्होंने पढाई की लेकिन किसी ने सच ही कहा है ''वो सफलता ही क्या जो बिना संघर्ष के मिल जाए'' जो लोग अपनी लाइफ में जितना स्ट्रगल करते है वो अपनी लाइफ में उतना ही आगे जाते है.


रजत शर्मा का जन्म 18 february 1957, Delhi में हुआ वे अपने माता पिता 5 भाई और एक बहन के साथ पुरानी Delhi के सब्जी मंडी के पास एक छोटे से मकान में रहते थे और उसे मकान कहा जाय या नही क्यूंकि वो सिर्फ 100 square feet का ही था जहाँ पर 9 लोग सो भी नहीं पाते थे तो इस वजह से एक के उपर एक तखत लगाकर सोना पड़ता था ना तो बिजली की व्यवस्था थी और ना ही पानी मिलता था इसलिए नहाने के लिए उन्हें municipality के नल पर जाना पड़ता था और कई बार तो खाना भी नहीं मिल पाता था.
पढ़ाई के लिए वे रात को station जाते और ये पढ़ाई में भी काफी अच्छे थे क्यूंकि उनको पता था की अगर इस गरीबी से छुटकारा पाना है तो इसका एक ही इलाज है पढाई करना जिससे की आगे चलकर उनको अच्छी जॉब मिल सके और उन्होंने अपनी starting की study पास ही के एक municipalities स्कूल सनातन धरम स्कूल से की और उस time बहुत कम लोगो के पास टीवी हुआ करती थी तो जाहिर सी बात है की रजत की family टीवी भी afford नहीं कर सकती थी लेकिन रजत को टीवी देखने का बहुत शौक था  इसलिए रजत अपने पड़ोसी के घर टीवी देखने जाते थे और उस जमाने में आधी फिल्म Saturday को आती थी और अधि फिल्म Sunday को आती थी

 तो रजत जी ने Saturday को फिल्म देखि हुई थी लेकिन जब वे Sunday को फिल्म देखने गए तो उन्होंने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया फिर जब वे अपने  घर वापस लौटे तो उनके आँखों में आंसू थे तो उनके पिता जी ने पूछा क्या हुआ उन्होंने कहा की शहीद भगत जी की movie थी आधी देखि हुईं थी और आज जब में देखने गया तो दरवाजा बंद कर लिया तो उनके पिताजी ने कहा ''बेटा! किसी दुसरे के घर में किसी तीसरे को टीवी पे देखने जाते हो अगर दम है तो कुछ ऐसा करो की तुम टीवी पर आओ जो लोग तुम्हे देखे''.
बस ये बात रजत ने अपने मन में ठान ली की वे कुछ न कुछ जरूर करके दिखाएंगे आगे चलकर रजत ने Karol Bagh के रामजस स्कूल में पढाई की और वे पैदल ही जाते थे लेकिन जब बारी आई collage में पढाई करने की तो उनके पास उतने पैसे नही थे की वो अपनी fees भर सके तभी उनके senior अरुण जेटली ने उनकी help करी और रजत ने भी बच्चो को पढाना start कर दिया और जिन अरुण जेटली की बात की है वे भारत के finance minister है.
इस तरह से रजत ने  Shree Ram College Of Commerce से अपनी graduation और post graduation complete की और साथ ही वे अपने कॉलेज के time ही JP movements से भी जुड़े थे जिस वजह से emergency लगने के बाद कुछ महीने उन्हें तिहाड़ jail में बीतानी पड़ी.
college complete हो जाने के बाद वे job की तलाश करने लगे और तब उनकी मुलाकात हुई Journalist Janardan Thakur जी से जिन्होंने उसी time ABP (ANANDA BAZAR PATRIKA) छोड़ी थी और  एक syndicate column लिखने की तयारी कर रहे थे  Janardan ने रजत को एक research के तौर पर heir कर लिया और उन्हें 400 रूपए महीने की सैलरी देने लगे तभी रजत ने उनके लिए research किये हुए कुछ topic को use करने के लिए उनसे permission मांगी और उन्ही information के जरिये उन्होंने onlooker के लिए अपनी पहली story लिखी जिसके लिए उन्हें सिर्फ 300 रूपए मिले और उनका इस field में interest और भी ज्यादा बढ़ गया.
आगे चलकर 1982 में onlooker ही join कर ली जहाँ उन्हें एक trainee reporter के तौर पर शामिल किया गया था लेकिन 2 साल के अन्दर ही अपनी काबिलियत और मेहनत के दम पर वे bureau chief बन गए और इस तरह से धीरे-धीरे रजत की लाइफ पटरी पर लौट चुकी थी.
रजत शर्मा की लाइफ में सबसे बड़ा turning point 1992 में आया जब Delhi से Mumbai की flight में उनके कॉलेज friend  "Gulshan Grover" ने उन्हें Zee network के chairmen सुभाष चंद्रा से मिलाया तभी बातचीत के दौरान उनके दीमाग में अदालत की तरह interview लेने का idea आया वेसे तो रजत print media में बहुत काम कर चुके थे मगर टीवी में काम करना उनके लिए बिलकुल ही नया था लेकिन उन्होंने बहुत अच्छे से इस काम को किया.
14 मार्च 1993 में AAP KI ADALAT का पहला episode telecast किया गया जिसमे लालू प्रशाद यादव guest थे और time उनकी प्रसिधी चरम पर थी और यही से ये show धीरे-धीरे करके इतना फेमस हुआ की रजत एक star बन गए और फिर 2004 में उन्होंने खुद का एक news channel start किया भले ही starting के दिन उनके लिए अच्छे नही रहे यहाँ तक की उन्हें अपनी properties बेच कर employees को सैलरी देनी पड़ी लेकिन अपनी strategy में बदलाव लेन के बाद India tv बहुत जल्द देश की सबसे बड़ी news channel में शामिल हो गई और रजत शर्मा ने भी AAP KI ADALAT show अपने channel पर शिफ्ट कर दिया.
2015 में उन्हें भारत सरकार ने शिक्षा और साहित्य में योगदान के लिए भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पदम् विभूषण से सम्मानित किया.

आशा करते है रजत शर्मा जी की story read करने के बाद आपको जरूर  inspiration मिली होगी.

Monday, 13 August 2018

दादी की कहानिया short Hindi stories with moral values

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आप के लिए इस लेख में हम लाये है panchatantra stories in hindi with moral values और moral stories for childrens in hindi.इस आर्टिकल में आप के पढने के लिए हमने 2 short panchatantra stories in hindi दिया हुआ.आप को panchtantra ki kahani in hindi with pictures में दी गयी है जिस से आप को पढने में अच्छा लगेगा.

कहानी-1 लालच

एक गाँव में दो भाई रहते थे एक भाई बहुत अमीर थे लेकिन एक भाई बहुत गरीब था एक भाई किसी भी फेस्टिवल पे बहुत जोर -शोर से खर्च करता था जब की दुसरे के पास कुछ नहीं था उसके पास सही से खाने तक नहीं था छोटे भाई का परिवार कभी-कभी भूखा रह जाता था क्यों की उनके पास कोई पैसा नहीं था .
 


एक दिन उसने फैसला किया की वो अपने भाई से मदद मांगेगा और अपने भाई के पास गया
छोटा भाई -मेरे बच्चे बहुत भूखे है कृपा मुझे थोडा सा पैसा उधार दे दो .मै उनके लिए कुछ खाना खरीदना चाहता हु .
बड़ा भाई-तुम हमेशा यहाँ पैसे मांगने आते हो मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ नहीं है निकल जाओ यहाँ से .
उनके ऐसे शब्द सुन कर छोटा भाई चला गया लेकिन जाते वक़्त रास्ते में उसे एक बुढा इन्सान मिला वो एक लकडियो का गट्ठर उठाये हुए था .
छोटा  भाई-रुक जाये ये बहुत भारी मै आप की मदद करता हु
और छोटा भाई उस गट्ठर  को उठा लेता है तब बुढा इन्सान बोला -शुकिया बेटे लेकिन तुम इतना परेशान क्यों लग रहे हो ?
छोटा भाई-मुझे पता नहीं है की मै क्या करू ?मेरा परिवार भूखा मर रहा है और मै उनके लिए खाना जुटाने में असफल रहा .अब मै क्या करू?
बुढा इन्सान-तो ये बात है मै तुम्हरे मदद करूँगा बेटे अगर तुम ये लकडियो का गट्ठर ले जाने में मेरी मदद करोगे मै तुम्हे कुछ ऐसा दूंगा जिस से तुम अमीर बन जाओगे .
छोटा भाई-मै आप की मदद करूँगा

और वो उस बूढ़े इन्सान के साथ उसके घर चला गया और लकडिया उसके घर पे रख दी.
बुढा-शुक्रिया बेटा ,भगवान तुम्हे खुश रखे और उस बूढ़े इन्सान ने उसे एक मीठी रोटी दी और कहा -इसे लो और जंगल में जाओ ,जब तुम आगे बढोगे तो तुम्हे 3 आलू बुखारे के पेड़ मिलेंगे .उनके पीछे एक पहाड़ है तुम उसे करीब से देखना वहां तुमे एक छोटी सी कुटिया दिखेगी उस कुटिया में जाना वहां तीन बौने होंगे उन्हें मीठी रोटी बहुत पसंद है वो तुमसे ये रोटी खरीदना चाहेंगे तुम उन्हें ये दे देना और बदले में उनसे 
पैसे मत लेना ,पैसे के वजाय तुम उनसे पत्थर से बनी चक्की मांगना .
छोटे भाई ने वैसा ही किया जैसा की उस बुढे ने कहा था जब जंगल पार कर के गया तब उसने देखा की एक कुटिया है वहा पे .जैसे ही वो उस कुटिया में गया वो बौने उस पर गुस्सा करने लगे
बौने -कौन हो तुम  और तुम अन्दर कैसे आये.ये जरुर ही ये चोर होगा
तभी उनमे से एक बौने ने उसके हाथ में मीठी रोटी देखी उनका सारा गुस्सा चला गया और उनमे से एक ने कहा -हमे ये मीठी रोटी दे दो और उसके बदले में तुम्हे जो लेना है ले लो
छोटा भाई -ठीक है मै तुम्हे ये दे दूंगा लेकिन उसके बदले में मुझे पत्थर से बनी चक्की चाहयिए
बौने -हमे मंजूर है लेकिन एक बात का ध्यान रखना ये कोई आम चक्की नहीं है जब तुम इस चक्की का इस्तेमाल करोगे तो ये तुम्हारी हर इच्छा पूरी करेगा जो तुम मांगोगे  और जब तुम्हरी इच्छा पूरी हो जाये तो इसे लाल कपडे से ढक देना इस तरह से ये चक्की रुक जाएगी.

उसने बौने से चक्की ली और घर की तरफ रवाना हो गया जब वो घर पंहुचा तो उसने देखा की उसकी पत्नी और बेटा जमीन पे पड़े है .उसने अपनी पत्नी से कहा की जमीन पे एक कपडा बिछा दे .

उसने फिर वो चक्की रखी और उस चक्की को घुमाने लगा उसने चक्की से खाना माँगा .
चक्की ने उसे खाना दे दिया .सब ने पेट भर के खाया इस तरह छोटा भाई अब सब कुछ पैदा करने लगा और उसका परिवार बहुत खुश था .छोटा भाई चक्की  से दाल,चावल,मसाले मांगता और फिर बाजार में ले जा कर बेच देता .वो अब अमीर हो गया था उसने अपने परिवार के
लिए बहुत बड़ा घर बनाया.अब हर एक पास नये कपडे थे सब बहुत खुश थे लेकिन उसका बड़ा भाई बिलकुल भी खुश नही था
बड़ा भाई -ये कैसे हो हुआ ?अभी कुछ दिन पहले वो मुझसे पैसे की भीख मांग रहा था और अचानक वो इतना अमीर बन गया

बड़ा भाई छोटे भाई के घर में छुप के बैठ गया और उसने राज का पता लगा लिया .अगले दिन उसने वो चक्की चुरा ली और अपने परिवार के साथ गाँव छोड़ने का फैसला किया .
वो अपने परिवार के साथ निकल गया गाँव से थोड़ी दूर पे एक नदी थी उसने नदी को पार करने के लिए एक नाव लिया सब उसमे बैठ गये.
रास्ते में उसने सोचा क्यों ना चक्की को परख लिया जाये और उसने कहा -ओ चक्की मुझे चावल दो चक्की चावल बनाने लगी लेकिन बड़े भाई को ये पता नहीं था की उस चक्की को रोका कैसे जाये चक्की चावल बनाती रही और धीरे-धीरे पूरी नाव चावल से भर गयी और सब डूब गये

कहानी-2 दोस्ती

एक समय की बात है एक घने जंगल में 4 बैल रहते थे वो हमेशा साथ रहते थे इसलिये उन से सब डरते थे उन डरने वालो में  उस जंगल का शहर भी शामिल था .शेर शिकार के लिए आता और उन चारो को साथ देखता और निरास हो कर चला जाता .

शेर-ये चारो हमेशा साथ रहते है मै इनका शिकार कैसे करू मै कल फिर आ के उन्हें देखता हु .
एक दिन चारो दोस्तों ने मिल कर एक प्लान बनाया .
एक बैल बोला-दोस्तों मैंने सुना है पास के जंगल में बहुत अच्छी घास है क्यों ना हम वहां जा के खाए
और सब ने हाँ कर दिया .अगले दिन वो चारो दोस्त उस जंगल की तरफ चल दिये उन्हें रास्ते में एक लोमड़ी मिली और उन्हें देखते ही दुम दिखा कर भाग गयी
वो अपनी ही धुन में  चलते रहे और जल्दी ही उस जंगल में पहुच गये उन्हें बहुत भूख लगी थी और घास खाने ही वाले थी की.
एक बैल बोला -एक काम कर पहले हम घास खा लेते है तब तक तू यहाँ खड़ा होकर पहरा दे 
दूसरा बैल -मै क्यों पहरा दू ,मुझे भी तो भूख लगी है 

पहला बैल-तुझे जादा टाइम लगेगा ना हमारे बाद तू भी खा लेना 
दूसरा बैल-मै तुम्हारा नौकर नहीं हु मै पहरा नहीं दूंगा ,मै भी साथ में खाऊंगा 
तीसरा बैल -हाँ भाई ये अकेले थोड़े खड़ा रहेगा ,तुम पहले खड़े हो जाओ
इस तरह से चारो दोस्तों में झगडा हो गया.सब के दुसरे से अलग हो गये और शेर ये सब दूर से देख रहा था और मौके की तलाश में रहता था .

शेर-आज बहुत अच्छा मौका है आज मै इन चारो को खत्म कर दूंगा
और शेर ने मौका देख कर उनपर हमला कर दिया और एक-एक कर के सब को मार दिया .
जब ये चारो साथ रहते थे तो किसी की हिम्मत नहीं होती थी इसलिये कहते है एकता में ताकत होती है 

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Friday, 10 August 2018

अनचाही pregnancy से पाएं छुटकारा pregnancy se bachne ke upay in hindi

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pregnancy को अगर रोकना चाहते है तो जरुर इस post को read करे pregnancy ko rokne ke upay in hindi या pregnant nahi hone ke upay in hindi या फिर what is the safe period to avoid pregnancy in hindi और ayurvedic garbh nirodhak upay और जाने pregnancy rokne ke tips hindi और pregnancy stop tips in hindi इस post में बताय गए तरीकों से आप अपनी pregnancy को रोक सकते है.

अनचाही pregnancy :-

pregnancy खुशियों के साथ-साथ जिम्मेदारीयां भी लाता है लेकिन जो couple इस जिम्मेदारी के लिए मानसिक रूप से त्यार ही नहीं है उनके लिए सबसे अच्छा और आसान तरीका है contraceptive जो महिलाएं pregnant नहीं होना चाहती है उनके लिए pregnancy एक बड़ी समस्या है वे घबरा जाती है कि कैसे वो pregnancy को रोके हर महीने अनचाही pregnancy ठहरने का ख़तरा मंडराता रहता है तो महिलाएं pregnancy से बचने के लिए कोशिश करती रहती है और pregnancy को रोकने के लिए कुछ ना कुछ खोजती रहती है . लेकिन pregnancy हर दिन नहीं ठहरती है इसके ठहरने का कुछ time भी होता है महीने में 2 या 3 दिन महिला के ovulation के दिन कहलाते है लेकिन बहुत मुश्किल होता है.
ये 2-3 दिन कौनसे होते है यह जानना तो आज आप जान लीजिये यह तरीका जिसका नाम है ovulation test kit ये kit pregnancy test की तरह होती है और ये आपको बाजार में मिल जायेगी या आप online भी purchase कर सकते है.

अब आपको इस kit का use कैसे करना है :-

इसे use करने के लिए पहले आपको ये जानना होगा की आपको periods कितने दिनों से आता है यानी एक periods से दुसरे periods के बीच का time(आपको जोड़ना है की आपके पहले पीरियड्स के पहले दिन से लेकर दुसरे पीरियड्स के पहले दिन के बीच का time जोड़ना है)इस के साथ एक चार्ट भी आएगा.

इस चार्ट की मदद से जाने test करना :-

एक तरफ period का cycle दिया है और दूसरी तरफ किस दिन से test करना है.
इस chart की मदद से एक उदाहरण समझिये :- मान लीजिये की आपका period 21 या 22 दिन का है तो आपको period आने के 6वें दिन से 5 दिन (6,7,8,9,10) तक test करना है इसी तरह 23 या 24 दिन का period होने पर 7वें दिन से 25 दिन का होने पर 8वें दिन से 5 वें दिन करना है इस प्रकार अगर 26 दिन का period है तो आपको 9 वें दिन से 5 दिन करना है 27 दिन का है तो 10 वें दिन से 5 दिन करना है यानि 14 दिनों तक (10,11,12,13,14) normally 28 दिन का ही periods ज्यादातर होता है 11 वें दिन से ovulation test करना start करना है और 5 दिन तक करना है जिस दिन positive आय उस दिन के बाद आपको 3-4 दिन तक sex नही करना है इसी प्रकार आपका period जितने दिनों का है उसी हिसाब से आप test कर सकते है आप chart को देख सकते है और जान सकते है.


pregnancy test kit का भी इसी तरह use होता है मगर pregnancy test में morning में urine लिया जाता है और इसमें दोपहर का urine लेना चाहिए इस test kit में 5 tester आयंगे जिससे आपको 5 दिन test करना होगा और जिस दिन positive आय उस दिन के बाद 3-4 दिन तक आपको sex नहीं करना है.


घरेलु नुश्खे गर्भपात के लिए तभी तक काम करते है जब गर्भ 1 या 2 महीने का हो जब pregnancy ज्यादा दिनों की हो जाय तब doctors से ही abortion कराना चाहिए और उन्ही से ही दावा लेनी चाहिए कई महिलाएं pregnant होने के बाद बाजार से pregnancy को रोकने की दावा ले लेती है जिससे बाद में उनको pregnant होने में दिक्कत आती है अगर आप pregnant होना चाहती है तो आपकी age 18 साल से ज्यादा और 35 साल से कम होनी चाहिए pregnancy से आप अनचाही pregnancy से तो बच सकती है लेकिन फिर बाद में ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है जिनके कारण आपको काफी दिक्कतें होती है और abortion करने के बाद शरीर में कमजोरी भी आ जाती है और इस वजह से आने वाले वक़्त में आपको pregnant होने में बहुत दिक्कतें आती है.

हल्दी :- हल्दी काफी गर्म होती है जो आपको अनचाहे गर्भ से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकती है.
एक चौथाई चम्मच हल्दी powder में उतना ही शहद मिलाकर रोजाना इसका सेवन करें और ये नुस्खा आपको तब तक करना है जब तक आपको अपनी समस्या से निजात ना मिले.

अदरक :-एक ताजा अदरक को छोटे टुकड़ो में काट लें और उसमे थोडा पानी मिलाकर 5 min. के लिए गर्म करें और स्वाद के लिए इसमें थोड़ा चीनी और गुड़ इस्तेमाल करें और आप इस drink को गर्म ही लें.
अगर आप गर्भवती महिला है तो आप गर्भनिरोधक गोलियों को बिलकुल भी ना लें.

इलाइची :- ज्यादा इलाइची खाने से गर्भपात की सम्भावना बड़ जाती है लेकिन याद रखे की इलाइची रात में नहीं खानी है.

बाजरा :- बाजरे को ज्यादा खाने से गर्भ गिरने की संभावना ज्यादा बड़ जाती है.



कच्चा पपीता :- अगर आप कच्चे पपीते का सेवन शुरुआती गर्भ अवस्था में करती है तो गर्भपात की समस्या बहुत ज्यादा बड़ जाती है.

गर्भनिरोधक से ना केवल family planing हो सकती है बल्कि योन रोंगों को भी रोका जा सकता है.

condom:-

pregnancy को रोकने के लिए या sex सम्बंधित किसी भी बीमारी से बचने के लिए सबसे अच्छा और आसान तरीका है condom. condom पुरुष और महिला दोनों के लिए option है दोनों के लिए आते है इसका work क्या है जब स्त्री और पुरुष आपस में love making कर रहे होते है तो पुरुष का sperm जो है स्त्री की योनी के द्वारा उसके शरीर में जाने से उसे रोकता है तो इससे ना तो अनचाही  pregnancy होती है बल्कि कोई भी sexual infection या decease  का भी खतरा नहीं होता है.


implant (प्रत्यारोपण) :-


implant को हार्मोन युक्त छोटी सी रोड के नाम से भी जाना जाता है ये महिला के arm के ऊपर की skin में लगाया जाता है जो pregnant होना नहीं  चाहती है और ये जो rod है 3-5 साल तक आमतौर पर वहां रह सकती है implant से progesterone हार्मोन निकलता रहता है जो स्त्री को pregnant होने से बचाता है implant से लगातार progesterone हार्मोन निकलता रहता है जो महिला को pregnant होने से बचाता है हारमोंस गरभेवा  के चारो ओर फैलकर mucus को गाढ़ा बना देता है जिससे sperm उसके पार नहीं जाते ह्र्मोंस की मात्रा के अनुसार ये ovary से x का production भी बंद कर देती है.


combined shot :-

estrogen और progesterone ये दो hormone injection है  जो महिला को हर महीने लेने होते है इससे महिलाओं के ovary में बनने वाले x कम हो जाते है यानि बंद हो जाते है जिससे pregnant होने का खतरा कम हो जाता है.


vasectomy(पुरुष नसबंदी):-


इसमें Vas deferens को अलग कर दिया जाता है जो ejaculation के दौरान testes से sperm को निकलते है ये surgery सबसे आसान है और इसका success rate भी सबसे ज्यादा है ये स्त्री और पुरुष दोनों करा सकते है.


hormonal IUD:-

IUD का मतलब (intrauterine device) इसको uterus में लगाया जाता है ये माचिस की तीली के बराबर उसकी मोटाई चीज़ होती है जो डोक्टोरो द्वारा uterus मे लगाइ जाती है ये 5 साल तक रेह सकती है.

inject-able contraceptive:-

inject-able contraceptive खाने वाली contraceptive कि तरह ही काम करता है ये cervical गाढ़ा करता है और egg fertilization को रोकता है इसको 3 महीने मे एक बार लगाया जा सकता है.


birth control skin patches:-

ये skin patches चौकोर होते है जिसमे female होरमोन estrogen ओर progesterone होता है जो कि skin के द्वारा blood मे  डाला जाता है लेकिन इससे STD में security नही है.

contraceptive pills (गर्भनिरोधक गोली ):-


असुरक्षित sex करने के बाद गर्भ से बचने के लिये स्त्रियाँ ये गोली लेती है इसका use sex के 72 घंटो के भीतर करना होता है क्यूंकि इसमें दो तरह के hormones होते है और ये कई दिनों तक काम करते है लेकिन ये कारगर हो इसकी guarantee नहीं है लेकिन sex के बाद जितनी जल्दी आप contraceptive pills लेते है  उतनी जल्दी ही उनका असर होता है.

इनमे से किसी भी चीज़ का इस्तेमाल करने से पहले specialist से जरुर पूछ ले उनकी सलाह के बाद ही आप इसका इस्तेमाल करें .



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