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पंचतंत्र कहानियाँ Hindi stories for kids panchatantra

हम लाये है आप के लिए panchtantra ki kahaniya या फिर कहे bachon ki kahaniyan in hindi इस आर्टिकल में आप को moral stories for childrens in hi...

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Friday, 14 September 2018

2 ऐसी कहानी जो आपकी सोच बदल दे motivational story in hindi

- 2 comments
इस पोस्ट में आपको success story in hindi या  hindi kahani या फिर kahaniya hindi mai और inspirational stories for students अगर आप इस kahaniya को पढेंगे तो आप भी बहुत कुछ सीख सकते है और अपनी लाइफ success पा सकते है.



                                                 कहानी 1 : संकल्प

क्या आपने कभी सोचा है जो सफल लोग होते है उनके पास ऐसी कौनसी वो खूबी होती है जो उनको सफल बना देती है लेकिन वही कुछ लोग छोटी-छोटी सफलताओं को लेकर भी तरसते है.
जो सफल लोगो की खूबी है "NEVER GIVE UP ATTITUDE"  जो उनको सफल के मुकाम तक ले जाती है. कभी ना हार मानने वाला जज्बा तो इस कहानी में भी हम पढेंगे की "NEVER GIVE UP ATTITUDE" कैसे हमारी लाइफ में वो सब कुछ दिला सकता है जिसकी हम कल्पना कर सकते है.

NEW YORK सिटी के बारे में तो सबने सुना ही है NEW YORK सिटी से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर एक  Island है पहले इस Island पर Manhattan New York आने-जाने का रास्ता था जिसकी वजह से लोगो को बहुत परशानी  का सामना करना पड़ता था.
ऐसी एक परेशानी जॉन रोबलिंग को हुई और वे इंजिनियर थे तब उन्हें लगा कितना अच्छा होगा अगर New York और Manhattan के बीच में एक ब्रिज बना दिया जाए और इस वजह से लोगो का काफी समय, कोशिश और पैसा बचाया जा सकेगा.
1883 में आज जैसी advance technology नहीं थी सारे काम manually करने होते थे और उस पानी के ऊपर ब्रिज बनाना आसान काम नहीं था इसलिए उनके आईडिया पर उनके साथ के सारे engineers ने उनका मजाक उड़ाया और कहा की वो project नामुमकिन है और वो भी इस विचार को दिमाग से निकाल दे इसके बाद उन्होंने काफी लोगो को approach किया लेकिन सभी ने इस project से हाथ खड़े कर लिए.
जॉन रोबलिंग अपने बेटे वाशिंगटन को मनाने में कामयाब रहे वाशिंगटन  भी इंजिनियर थे और वह अपने पिता के इस project का हिस्सा बन गए दोनो ने मिलकर project को तैयार किया कुछ काम करने वाले लोगो को और कुछ दुसरे engineers को बहुत मुश्किल से काम करने के लिए मना लिया.


आखिरकार उस समय दुनिया के सबसे बड़े ब्रिज बनाने का काम शुरू हो गया सबकुछ सही चल रहा था की अचानक construction के दौरान एक एक्सीडेंट हुआ और जॉन पूरी तरह से जख्मी हो गए और चोट के दरान कुछ ही दिनों बाद उनकी म्रत्यु हो गई उस time सब कुछ रुक गया था थम सा गया था सबको लगा की जॉन का सपना सिर्फ सपना ही रह जाएगा लेकिन उनके बेटे वाशिंगटन रोब्लिंग जिन्हें शायद हार मंजूर नहीं थी और उनके लिए उनके पिता का सपना साकार करना सबसे बड़ी चीज़ थी और फिर उस project पर काम जारी किया गया कुछ दिन तो बहुत अच्छा चला लेकिन फिर अचानक एक दिन फिर से एक एक्सीडेंट हुआ और उस एक्सीडेंट ने वाशिंगटन को पूरी तरह अपाहिज बना दिया उनकी पूरी body paralyzed हो गई लेकिन अब तो जॉन सिर्फ बिस्तर पर पड़े रह सकते थे और महीनो बाद जॉन को अचानक याद आया की भले ही उनकी पूरी body paralyse है लेकिन एक ऊँगली तो अभी भी काम कर रही है ना और उन्होंने सोचा की अभी तो मेरी ज़िन्दगी है अभी भी वो सबकुछ किया जा सकता है और वह उसी उंगली को use करेगा और project को पुर करेगा.
उन्होंने अपनी वाइफ एमिली को अपने पास बुलाया और उनके हाथ पर उंगली से scretch किया लेकिन एमिली उस समय कुछ समझ ना सकी पर कुछ दिनों की कोशिश के बाद दोनों के बीच बातचीत के लिए कुछ coding  develop हुए और वाशिंगटन अब अपनी बात एमिली  को अच्छे से scretch करके समझा सकते थे.
उन्होंने अपनी वाइफ को कह के सारे engineers बुलाए एमिली ने सारे engineers को बुलवाया और project को कैसे आगे करना ये उनलोगों को समझाया और फिर एक बार project शुरू हुआ और 13 साल तक वाशिंगटन बस्तर पर पड़े रहे और सिर्फ एक उंगली की मदद से सबको guide करते गए और अंततः दुनिया का सबसे बड़ा ब्रिज ....... लोगो के सामने था.
जहाँ लोग एसे समय में सिर्फ अपने अंत का इन्तीज़र करते है  "एसे में वाशिंगटन ने वो करके दिखाया जो कोई सोच भी नहीं सकता था सिर्फ अपने NEVER GIVE UP ATTITUDE की वजह से अपने determinantion की वजह से हम भी वो सब हासिल कर सकते है जो आप चाहते है बस पूरी मेहनत के साथ पुरे लगन के साथ पूरी निष्ठा के साथ उस काम को करते रहिए एक दिन सफलता आपको जरूर मिलेगी."



                                         कहानी 2 : भगवान मौजूद है

एक ग्राहक एक नाई की दुकान गया उसके बाल और उसकी दाढ़ी काटवाने हमेशा की तरह।
तभी आपस में दोनों की एक अच्छी बातचीत शुरू हुई और कई विषयों में दोनों की आपस में अच्छी बातें हुई।
अचानक, भगवान के विषय में बात हुई ।
नाई ने कहा: "देखो यार, मैं नहीं मानता कि भगवान मौजूद है."
ग्राहक से पूछा: "तुम ऐसा क्यों कहते हो?"।
नाई ने कहा: खैर, यह इतना आसान है; तुम बस बाहर जाना और सड़क पे देखना एहसास करना कि भगवान मौजूद नहीं है । अगर भगवान का अस्तित्व होता तो, वहां इतने सारे लोग बीमार है? और इतने सारे abandoned बच्चे? अगर भगवान है, तो वहां न तो कोई दुख में होगा और न ही कोई दर्द में। "मैं ऐसे भगवान के बारे में नहीं सोच सकता जो   यह सब देख कर भी चुप है।".
"ग्राहक एक पल के लिए सोचना बंद कर दिया और चुप हो गया लेकिन वह इस बात पर बहस नहीं करना चाहता था।
नाई ने अपना काम खत्म किया और ग्राहक दुकान से बाहर चला गया ।
ग्राहक जब नाई की दुकान के बाहर आया, उसने एक लंबे बाल और दाढ़ी के साथ गली में खड़े एक आदमी को देखा (ऐसा लगता है


कि इसंने काफी लंबे समय से उसने अपने बाल नहीं कटवाए और वह इतना गंदा दिख रहा था) ।
ग्राहक फिर से नाई की दुकान में प्रवेश किया और उसने नाई से कहा: "पता है क्या?  नाइ मौजूद नहीं है."
नाई ने पूछा: '' आप ऐसा कैसे कह सकते हैं, कैसे मौजूद नहीं है? '' ।
ग्राहक ने कहा: "ठीक है एक बात बताओ मैं यहां हूं और क्या मैं एक नाई हूं और क्या मेने अभी तुम्हारे बाल काटे है?" "नहीं!"- तो नाइ मौजूद नहीं है क्योंकि अगर होता तो वहां उस आदमी की तरह गंदे लंबे बाल और असीमित दाढ़ी वाले लोग नहीं होंगे। लेकिन "नाई मौजूद नहीं है! ऐसा तब होता है जब लोग मेरे(नाई)के पास नहीं आते हैं"।
"यही तो बात है! भगवान भी, मौजूद है! क्योंकि लोग मदद के लिए भगवान की ओर नहीं देखते हैं, इसलिए दुनिया में इतना दर्द और पीड़ा है."।



एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

Thursday, 13 September 2018

सीख देती बच्चों की तीन कहानी baccho ki kahaniya

- No comments
इस पोस्ट में आपको bachon ki kahaniyan in hindi और panchatantra kahaniya इसके अलावा short motivational story in hindi और motivational stories for students या फिर hindi kahani जैसी बच्चों के लिए intresting story पढने को मिलेगी.



                                          कहानी 1 - जन्नत का दूसरा नाम है माँ 

एक छोटा लड़का एक शाम को रसोई घर में अपनी मां के पास आया, उसकी माँ खाना पका रही थी,
वह बच्चा एक कागज़ के पन्ने पर लिख रहा था और फिर अपनी माँ को पकड़ाया और कहा की माँ इसको पढो ।
उसके बाद उसके माँ के हाथ गिले थे जब तक वह अपने हाथों को सूखाती उस बच्चे ने खुद उसे पढ़ के सुना दिया.
उस पन्ने में यह लिखा था कि:

  • घास काटने के लिए: $5.00
  • इस सप्ताह मेरे कमरे की सफाई के लिए: $1.00
  • आप के लिए दुकान में जाने के लिए: $.50 
  • जब आप खरीदारी करने जाते हो मेरे छोटे भाई को देखने के लिए: $.25
  • कूड़ा बाहर ले जाने के लिए: $1.00
  • एक अच्छा रिपोर्ट कार्ड प्राप्त करने के लिए: $5.00
  • यार्ड की सफाई करने के लिए: $2.00
  • कुल बकाया: $14.75

खैर, उसकी माँ ने उसे वहाँ खड़े देखा, और लड़के की यादें चमकती हुई देख सकती थी.
और उसकी माँ ने कलम उठाया, पन्ना पलटा और लिखना शुरू किया:

  • नौ महीने जब तुम मेरी कोक में बढ़ रहे थे मेरे अंदर: कोई चार्ज नहीं
  • सभी रातें मैं तुंहारे साथ बैठी, तुम्हारे लिए प्रार्थना की : कोई शुल्क नहीं
  • तुम्हारे सभी आंसू जब तुम रोते थे तो मेरी सारी कोशिश और  समय सिर्फ तुम्हे ख़ुश रखने के लिए : कोई शुल्क नहीं
  • मैं जानती थी (गर्भवती) वो मरने से भरे सभी रातें, और चिंताओं के लिए: कोई आरोप नहीं
  • खिलौने, भोजन, कपड़े के लिए, और यहां तक कि तुम्हारी नाक पोंछने के लिए: कोई शुल्क नहीं
  • जब आप इसे जोड़ेंगे तो मेरे लिए प्यार की लागत है: कोई शुल्क नहीं

जब लड़के ने अपनी मां का लिखा हुआ पत्र पढ़ना समाप्त किया तो, उसकी आँखों में बड़े आँसू थे, और उसने देखा सीधे अपनी मां के पास गया और कहा, "मां, मुझे माफ़ कर दो में तुमसे बहुत प्यार करता हूं." और फिर वह कलम ले लिया और महान बड़े अक्षरों में उसने लिखा:
"पूर्ण में भुगतान किया."
"मरने के लिए बहुत रस्ते है पर जन्म लेने के लिए सिर्फ माँ ......माँ तो वो फ़रिश्ता है जिसकी किख से जन्म लेने के लिए भगवान् भी तरसते हैं".





कहानी 2 - कवर द्वारा आप इस पुस्तक को जज नहीं कर सकते

एक फीकी ड्रेस में एक लेडी और उसका पति, एक मोटा घिसा सूट में सजे-धजे, बोस्टन ट्रेन से बाहर निकले और हार्वर्ड विश्वविद्यालय राष्ट्रपति के बाहरी कार्यालय में एक नियुक्ति के बिना डरपोक चाल चलने लगे.
सचिव ने उन दोनों को देखा और कहा इन जैसे लोगो के लिए, देश में कोई व्यवसाय नहीं है. और यहाँ तक की हार्वर्ड और शायद कैम्ब्रिज में रहने के लायक भी नहीं है।
आदमी ने धीरे से कहा "हम राष्ट्रपति को देखना चाहते हैं,"।
सचिव बोले "वह पूरे दिन व्यस्त रहेंगे"।
महिला ने कहा  "हम इंतज़ार करेंगे"।
घंटों तक सचिव ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, यह उम्मीद करते हुए कि दोनों कुछ समय बाद निराश हो जाएंगे और चले जाएंगे। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया और सचिव निराश हो गए और अंततः राष्ट्रपति को बताने का फैसला किया।
सचिव ने कहा, "शायद अगर आप उन्हें कुछ मिनट के लिए और उनका इंतज़ार करते हैं, तब तक वे चले जाएंगे।
आदमी  "उत्तेजना में चिल्लाया और जोर से कहा, किसी का महत्व बस उसको देख के या उसके कपड़ो को देख काफर ही होता है क्या उनके पास खर्च करने का समय नहीं था उनके साथ बिताने के लिए, लेकिन उन्होंने  फीकी ड्रेस अव्यवस्था मोटा घिसा सूट कपड़ों से घ्रणा की.


राष्ट्रपति, स्टर्न का सामना करना पड़ा और गरिमा के साथ, दोनों की ओर झुका ।
महिला ने उससे कहा, "हमारे एक बेटे थे जिन्होंने हार्वर्ड में एक वर्ष तक भाग लिया था। वह हार्वर्ड से प्यार करता था। वह यहाँ खुश था लेकिन लगभग एक साल पहले, वह गलती से मारा गया था। मेरे पति और मैं उसके लिए कैंपस में कहीं एक मेमोरियल बनाना चाहते हैं।
"राष्ट्रपति को यह बात अजीब लगी और वह चौंक गया"। उन्होंने कहा, "मैडम," "हम हार्वर्ड में भाग लेने वाले हर व्यक्ति के लिए एक मूर्ति नहीं लगा सकते हैं और अगर हमने ऐसा किया, तो यह जगह एक कब्रिस्तान की तरह दिखाई देगी। "
"ओह, नहीं," लेडी ने जल्दी से समझाया । "हम कोई मूर्ति नहीं खड़ा करना चाहते । हमने सोचा कि हम हार्वर्ड के लिए एक इमारत दे. "
राष्ट्रपति अपनी आंखें इधर-उधर  करने लगे। उन्होंने ड्रेस और मोटा घिसे सूट पर देखा और फिर कहा, "एक इमारत! क्या आपके पास कोई सांसारिक विचार है कि भवन की लागत कितनी है? हार्वर्ड में भौतिक भवनों में हमारे पास साढ़े सात मिलियन डॉलर है। "
हमारे पास खत्म हो गया है. 
एक पल के लिए लेडी चुप थी ।
राष्ट्रपति ने प्रसन्नता जताई हो सकता है कि वह अब उनसे छुटकारा पा सके.
महिला अपने पति के पास चली गई और चुपचाप कहा, "यह सब क्या है? एक विश्वविद्यालय शुरू करने के लिए लागत? हम अभी अपना खुद का क्यों नहीं शुरू नहीं करते? "
उसके पति ने सर हिलाया।
राष्ट्रपति का चेहरा असमंजस और घबराहट में मुरझा गया ।
दोनों लेलँड स्टैनफोर्ड उठकर चले गए और दूर यात्रा करने के लिए निकल गए  
पालो ऑल्टो, कैलिफोर्निया जहां उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना की थी 
नाम भालू , स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, अपने बेटे के लिए एक स्मारक बनवाई और कहा अब परवाह नहीं है।
आप आसानी से दूसरों के चरित्र का न्याय कैसे कर सकते हैं
वे उन लोगों के साथ व्यवहार करते हैं जो उन्हें लगता है कि वे कुछ भी नहीं कर सकता है।



                                कहानी 3 - कमजोरी या ताकत?

कई बार आपकी सबसे बड़ी कमजोरी आपकी सबसे बड़ी ताकत बन जाती है ।
उदाहरण के लिए, ले लो, की कहानी
एक 10 साल का लड़का और उसने इस उम्र में भी सीखने का फैसला किया लेकिन
एक विनाशकारी कार दुर्घटना में उसने अपनी बाईं बांह खो दी।
लड़का एक पुराने जापानी जूडो मास्टर Sensei के साथ जुडो सीखना शुरू किया ।
लड़का अच्छा कर रहा था, इसलिए वह समझ नहीं पा रहा था कि क्यों, training के तीन महीने बाद
 मास्टर ने उसे केवल एक चाल सिखाई थी ।
लड़का अंत में कहा, "Sensei," "क्या मैं और चालें नहीं सीख सकता?"
Sensei ने जवाब दिया "यह move केवल तुंहें पता है, लेकिन इस move को तुम्हे अच्छे से जानने की आवश्यकता होगी,"
उसमें अभी इतनी समझ नहीं है, लेकिन अपने शिक्षक में उसे बहुत विश्वास है, और इसी विश्वास के साथ वह सीखता रहा ।
कई महीने बाद, Sensei अपने पहले टूर्नामेंट के लिए उस लड़के को ले लिया ।
खुद हैरान, लड़का आसानी से अपने पहले दो मैच जीते ।
तीसरा मैच ज्यादा मुश्किल साबित हुआ, लेकिन कुछ समय बाद
उनके विरोधी अधीर हो गए और आरोप लगाया; लड़के ने मैच जीतने के लिए चतुराई से अपने एक कदम का इस्तेमाल किया ।
अब भी उसकी सफलता से चकित, लड़का अब फाइनल में था ।
इस बार उनका प्रतिद्वंद्वी बड़ा, मजबूत और अधिक अनुभवी था । कुछ देर के लिए लड़का overmatched दिखाई दिया।
रेफरी एक समय बाहर बुलाया वह चिंतित है कि लड़का चोटिल हो सकता है।
वह मैच रोकने वाला था तभी sensei ने हस्तक्षेप किया ।
Sensei ने जोर देकर कहा, "नहीं," "उसे जारी रखने दो ।
मैच शुरू होने के तुरंत बाद, उसके प्रतिद्वंद्वी ने अहम गलती की: उन्होंने अपना पहरा गिरा दिया ।
तुरन्त, लड़का उसे पिन करने के लिए कदम रखा ।
इस लड़के ने मैच और टूर्नामेंट जीता था वह चैम्पियन था ।
घर के रास्ते पर, लड़के और Sensei प्रत्येक और हर मैच में हर कदम की समीक्षा की ।
फिर लड़के ने हिम्मत दिखाते हुए पूछा "Sensei, मैं केवल एक कदम के साथ टूर्नामेंट कैसे जीत गया?"
"Sensei ने जवाब दिया "तुम दो कारणों के लिए जीते हो," ।
"सबसे पहला, तुम्हे जुडो के उस moves में महारत हासिल है जो की बहुत कठिन moves है ।
और दूसरा, उस कदम के लिए ही ज्ञात रक्षा के लिए है अपने दुश्मन अपने बाएं हाथ हड़पने के लिए. "

"लड़के की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई थी"।




एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

Tuesday, 11 September 2018

परिवार और फूटे घड़े की कहानी kahani in hindi

- No comments
ये है  panchtantra ki kahani hindi और moral stories for childrens in hindi इस पोस्ट में बताई गई है और इसके आलावा hindi bal kahani या kahaniya in hindi या फिर inspirational stories in hindi for students और kahani hindi में read करें और कुछ सीख लें.



                                      कहानी 1- परिवार क्या है?

एक आदमी देर से काम से घर आया, थका हुआ और परेशान,
अपने 5 साल के बेटे को दरवाजे पर उसके लिए इंतजार करने के लिए।
बेटा: "पिताजी, क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं?"
पिता: "हाँ पुछो?"
बेटा: "पिताजी, आप एक घंटे में कितना कमाते हैं?"
पिता: "यह तुन्हारे काम की बात नहीं है। तुम इतनी चीज़ क्यों पूछते हो? "आदमी ने गुस्से में कहा।
बेटा: "मैं बस जानना चाहता हूँ। कृपया मुझे बताओ, आप एक घंटे में कितना कमाते हैं? "
पिता: "अगर तुम्हे जानना ही है तो मैं $ 20 प्रति घंटे कमाता हूं।"
बेटा: "ओह,", "पिताजी, क्या मैं $ 10 उधार ले सकता हूं?"
पिता क्रोधित थे, "अगर  तुमने यही एकमात्र कारण पूछा है तो तुम खरीदने के लिए कुछ पैसे उधार ले सकते हो और क्या करोगे एक खिलौना खरीद लोगे बस और वो भी कुछ दिन बाद ख़राब कर दोगे, तुम सीधे अपने कमरे में अपने बिस्तर पर जाओ।
और इस बारे में सोचो कि तुम इतने स्वार्थी क्यों हो। मैं इस बचपन के व्यवहार के लिए हर रोज कड़ी मेहनत करता हूं। "
छोटा लड़का चुपचाप अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर दिया। आदमी बैठ गया और यहां तक ​​कि बडबडाना शुरू कर दिया और छोटे लड़के के सवालों के बारे में परेशान और सोचने लगा। "वह कुछ पैसे लेने के लिए ऐसे प्रश्न पूछने की हिम्मत कैसे करता है"?
लगभग एक घंटे के बाद, आदमी शांत हो गया, और सोचने लगा: शायद उसे वास्तव में $10 की आवश्यक थी ।
आदमी छोटे लड़के के कमरे के दरवाजे के पास गया और दरवाजा खोला।


पिता: "तुम सो रहे हो, बेटा?"।
बेटा: "नहीं पिताजी, मैं जाग रहा हूं," ।
पिता ने कहा, "मैं सोच रहा था, शायद मैं तुम पर बहुत ज्यादा चिल्ला दिया।" "मेने  तुम्हे $10 के लिए इतना चिल्ला दिया। "
छोटा लड़का सीधे मुस्कुराकर बैठ गया।
पिता: ने उसे  $10 दे दिए ।
बेटा: "ओह, धन्यवाद पिताजी!" फिर, अपने तकिए के नीचे से उसने कुछ पैसे निकाले ।
पिता:, यह देखकर कि लड़के के पास पहले से पैसा था, फिर से गुस्सा होना शुरू कर दिया।
छोटे लड़के ने धीरे-धीरे अपना पैसा गिन लिया, और फिर अपने पिता को देखा।
पिताजी ने गुस्से में कहा, "यदि तुम्हारे पास पहले से कुछ पैसे थे तो तुम्हे और अधिक पैसा क्यों चाहिए थे?"
छोटे लड़के ने जवाब दिया, "क्योंकि मेरे पास पर्याप्त नहीं था, लेकिन अब हो गए है।"
"पिताजी, मेरे पास अब $20 हो गए है । क्या मैं आपका एक घंटा खरीद सकता हूँ? कृपया कल जल्दी घर आओ।
मैं आपके साथ खाना खाना चाहता हूं। "
इस कहानी को अपनी पसंद के किसी व्यक्ति के साथ share करें .... लेकिन इससे भी बेहतर, किसी के साथ जिसे तुम प्यार करते हो उसके साथ समय बिताए।


यह आप सभी को जीवन में इतनी मेहनत करने के लिए बस एक छोटा reminder है।
हमें उन लोगो के साथ समय बिताना चाहिए जो वास्तव में हमारे लिए महत्वपूर्ण है, जो हमारे दिल के करीब हैं।
"अगर हम कल मर जाएंगे, तो जिस कंपनी के लिए हम काम कर रहे हैं, वह हमें आसानी से बदल सकता है"।
लेकिन परिवार और दोस्तों को हम पीछे छोड़ देंगे, उनके बाकी के जीवन के लिए नुकसान महसूस करेंगे। और आओ इसके बारे में सोचें, हम अपने परिवार की तुलना में खुद को काम में डाल देते हैं। वास्तव में एक मूर्ख निवेश! तो कहानी का नैतिक क्या है ???
बहुत मेहनत मत करो ... और आप जानते हैं कि परिवार का पूरा शब्द क्या है?
FAMILY = (F)ATHER (A)AND (M)MOTHER (I) (L)LOVE (Y)YOU!



                                          कहानी 2- फूटा घड़ा 


एक समय की बात है किसी गाँव में एक किसान सुबह उठ कर अपने घर से दूर नदी से पानी लेने जाया करता था.
वह दो बड़े घड़ों में पानी लाया करता था, और वह घड़ों को एक डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर लटका लेता था.
एक घड़े में दरार थी, और जबकि दूसरे घड़ा सही था.
हर रोज घर तक पानी लाते-लाते उस घड़े का सारा पानी धीरे-धीरे खत्म होते बस आधा घड़ा पानी ही रह जाता और ऐसा दो सालों से चल रहा था.
जो घड़ा सही था उसे इस बात का बहुत घमण्ड था की वह पूरा का पूरा पानी घर तक सही पहुंचा पाता है और उसके अन्दर कोई कमी नही है और वहीँ दूसरा घड़ा इस बात से बहुत शर्मिंदा था की वह पानी आधा ही पहुँचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है तो फूटा घड़ा इस बात को लेकर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नही गया और उसने किसान से कहा की मालिक! में आपसे माफ़ी मांगना चाहता हूँ हर-रोज मेरी वजह से आपकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है.
किसान ने पूछा: क्यों?
घड़े ने दुखी होते हुए कहा: शायद आप नहीं जानते की में एक जगह से फूटा हुआ हूँ और पिछले 2 सालों से, मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था में नहीं पहुँचा पाया बस उसका आधा ही पहुँचा पाया हूँ मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है.


किसान: घड़े की बात सुनकर थोडा दुखी हुआ और कहा कोई बात नहीं आज घर लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो ।
घड़े ने ऐसे ही किया वह रस्ते में सुन्दर फूलों को देखता आया और ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर हुआ तो वेसे ही घर पहुँचते उस घड़े का पानी आधा ही रह गया और वह मायूस होकर किसान से क्षमा मांगने लगा.
किसान ने कहा : शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पुरे रस्ते में जितने भी फूल थे वो सब बस तुम्हारी तरफ ही थे सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था ऐसा इसलिए क्यूंकि में तुम्हारे अन्दर की सारी कमी को जानता था और मेने इसका लाभ उठाया मेने तुम्हारे वाले रास्ते पर रंग-बिरंगे वाले बीज बो दीए और तुम्हारी वजह से वह रास्ता इतना खूबसूरत बन गया और आज तुम्हारी वजह से ही में इन फूलों को भगवान् को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ और अब "तुम्ही सोच लो" अगर तुम ऐसे नहीं होते तो क्या में ये सब कुछ कर पाता.
"हम सभी के अन्दर कोई न कोई कमी तो होती ही है और यही कमियाँ हमे अनोखा बना देती है".
तो हमे भी उस किसान की तरह लोगो को जो जैसा है वेसे ही स्वीकार करना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए और जब हम ऐसा करेंगे तो फूटा घड़ा भी अच्छे घड़े से मूल्यवान हो जाएगा.

एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

तीन मजेदार रोचक कहानी hindi kahani

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इस पोस्ट में आपको hindi stories for kids और story in hindi या hindi kahaniyan for child जैसी story मिलेंगी इसके आलावा small story in hindi और small moral stories in hindi या baccho ki kahaniya भी इस पोस्ट में आपको मिल जाएंगी.

 



                                             कहानी 1 - भेड़ की खाल में भेड़िया 

एक भेड़िया जो भेड़ो के झुंड को खाना चाहता था. चरवाहे और उसके कुत्तों के कारण भेड़िए के लिए भेड़ो का शिकार करना बहुत मुश्किल हो गया था और वह बहुत दिनों से भूका भी था इस वजह से उसे घांस खाकर ही गुजारा करना पड़ता था और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था फिर उसने तीन-चार दिन बाद भेड़ों को मारने की कोशिश की लेकिन सफल ना हो सका. 
एक दिन उसे कहीं से पड़ी हुई भेड़ की खाल मिल गई जिसे देखकर वह फूला नही समाया और उसके दिमाग में एक आईडिया की जब चरवाहा भेड़ो को चराने ले जाएगा तभी में भी इस खाल को पहन के उनके साथ निकल जाऊँगा और मौका देख भेड़ो को खा जाऊँगा उसने उस खाल को पहन लिया और भेड़ो की टोली में शामिल हो गया.
भेड़ों की टोली का एक छोटा भेड़ उस भेड़िए के पीछे -पीछे चलने लगा जिसने भेड़ की खाल पहनी हुई थी.
अपनी चाल में सफल होते देख भेड़िया बहुत खुश था वह भेड़ को अपने पीछे-पीछे चलाते-चलाते उसे झुंड से अलग ले गया वह जंगल में गया और भेड़ भी उसके पीछे-पीछे गया.
जंगल में एक शुरक्षित स्थान पर पहुँच कर उसने भेड़ को मार दिया और खा लिया और कुछ समय के लिए वह भेड़ को धोखा देने में सफल रहा, और हार्दिक भोजन का आनंद लेता रहा.
"इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की आँखों देखा हमेशा सच नहीं होता".



                                                   कहानी 2 - पहाड़ 

एक बेटा और उसके पिता पहाड़ों पर घूम रहे थे ।
अचानक, उसका बेटा गिर जाता है, और उसको दर्द होता है वह दर्द से चिल्लाने लगता है: "AAAhhhhhhhhhhh!"
और और उसे अपने चीखने की आवाज आती है वह चौंक जाता है की पहाड़ से मेरे जैसे आवाज कहाँ से आई: "AAAhhhhhhhhhhh!"
वह फिर से जोर से चिल्लाता है: "तुम कौन हो?"
और उसे उत्तर प्राप्त होता है: "तुम कौन हो?"
फिर वह पहाड़ से चिल्लाता है: "मैं तुंहें प्रशंसा करता हूँ!"
फिर से जवाब मिलता है: "मैं तुंहें प्रशंसा करता हूँ!"
बार-बार ऐसा होने पर वह नाराज हो जाता है, वह चिल्लाता है: "कायर!"
वह उत्तर प्राप्त करता है: "कायर!"
वह अपने पिता को देखता है और पूछता है: "क्या हो रहा है?"
पिता मुस्कुराता है और कहता है: "मेरे बच्चे, ध्यान देना ।
फिर आदमी चिल्लाता है: "तुम एक चैंपियन हो!"
जवाब मिलता है: "तुम एक चैंपियन हो!"
लड़का हैरान हो जाता है, लेकिन उसे कुछ समझ में नहीं आता की ये हो क्या रहा है ।
फिर वह अपने पापा की ओर देखता है और उसके पापा उसको समझाते हैं – "लोग इसे गूंज कहते हैं,
लेकिन वास्तव में यह जीवन है ।
यह तुम्हे सब कुछ वापस कर देते है ।
हमारा जीवन बस हमारे कार्यों का एक प्रतिबिंब है ।
यदि आप दुनिया में और अधिक प्यार चाहते हैं,
तो अपने दिल में और अधिक प्यार पैदा करे ।
यदि आप अपनी टीम में और अधिक क्षमता चाहते हैं,
तो अपनी क्षमता में सुधार लाएं।
यह रिश्ता हर चीज पर लागू होता है, जीवन के सभी पहलुओं में;
जीवन आपको वह सब कुछ वापस दे देगा जो आपने उसे दिया है . "
"आपका जीवन एक संयोग नहीं है । यह आप का एक प्रतिबिंब है!"




                                           कहानी 3 - सुंदर उपहार!



एक युवक ग्रेजुएट कॉलेज में तैयारी कर रहा था । कई महीनों पहले उसने अपने पिता से एक सुन्दर स्पोर्ट्स कार की प्रशंसा की थी.
जैसे ही स्नातक दिवस का दिन आया, युवा व्यक्ति को इस बात का इंतजार था कि उनके पिता ने उसके लिए कार खरीदी है।
अपनी ग्रैजुएशन की सुबह उसके पिता ने उसे अपने प्राइवेट स्टडी में बुलाया ।
उसके पिता ने उसे बताया कि ऐसे ललित पुत्र पर उन्हें कितना गर्व है, और वे उससे कितना प्यार करते है । उन्होंने अपने बेटे को सुंदर उपहार बॉक्स लपेटकर सौंप दिया । वह उत्सुक था लेकिन कुछ हद तक निराश भी युवक ने बॉक्स खोला और एक सुंदर, चमड़े से बंधी  पवित्र गीता पाई।
उस युवक ने खरी खोटी, अपने पिता को सुनाई और कहा, "आपके पास इस्त्ने सारे पैसे है फिर भी आपने मुझे एक पवित्र पुस्तक पकड़ा दी? "और पवित्र पुस्तक छोड़कर घर से बाहर निकल गया.


उसने अपने पिता से कभी भी लंबे समय तक दोबारा संपर्क नहीं किया । 
कई साल बीत गए और युवक अपने कारोबार में काफी सफल रहा । उसके पास एक सुंदर घर और अद्भुत परिवार है, लेकिन उसने अपने पिता को याद किया उसे एहसास हुआ, और सोचा कि उसे अपने पिता से मिलने जाना चाहिए.
उसने स्नातक दिवस के बाद से अपने पिता को नहीं देखा था ।
व्यवस्था करने से पहले, उसे टेलीग्राम मिला जिसमे उसे बताया गया कि उसके पिता का निधन हो गया, और सारी संपत्ति अपने बेटे को दे दी।
उसे तुरंत घर आने और देखभाल करने की जरूरत थी. जब वह अपने पिता के घर पहुंचा और देखा अचानक उदासी और अफसोस उसका दिल भर गया । वह शुरू हुआ अपने पिता के महत्वपूर्ण कागजात खोजने के लिए और उसकी नजर उसी नई पवित्र गीता पर पड़ी, जैसा वह छोड़कर गया था वेसे ही रखी थी.
आंसुओं के साथ उन्होंने पवित्र गीता खोली और पन्नों को मोड़ना शुरू किया और जैसे ही वह उन शब्दों को पढ़ा एक कार की चाबी पवित्र गीता के पीछे टेप किए गए एक लिफाफे से गिरी । यह डीलर के साथ एक टैग था नाम, वही डीलर जिसकी वांछित स्पोर्ट्स कार थी। टैग पर उसकी तारीख थी स्नातक, और पूर्ण में भुगतान शब्द ।
"हम भगवान का आशीर्वाद कितनी बार याद करते है क्योंकि हम उम्मीद करते है उन्हें पैक नहीं किया जाता"?

Saturday, 8 September 2018

पंचतंत्र की कहानी story in hindi

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 अगर आप baccho ki kahaniya या panchatantra in hindi या फिर motivational stories for students जैसी कहानियां ढूंड रहे है तो आप यहाँ सही आए है यहाँ आपको inspirational stories for students और kahaniya in hindi में मिल जाएंगी बच्चों के लिए बहुत ही प्रेरणा दायक कहानियां है इस post में.


                                               कहानी 1 - बाड़ में एक छेद

एक छोटे से गाँव में एक छोटा लड़का था, जिसे बहुत ज्यादा गुस्सा आता था ।
वह अपने माता-पिता के साथ रहता था और वह उनका इकलौता बेटा था.
और उस छोटे लड़के के माता-पिता उसके गिस्से से बहुत परेशान और उदास थे.
उस लड़के को बहुत जल्दी गुस्सा आता था और दुसरो को गुस्से से कुछ भी बोल देता था ताना कोसता था और वह इस तरह दूसरों को बोल देता था जिससे उनलोग को चोट पहुँचती थी और अपने गुस्से की वजह से अपने दोस्तों, पड़ोसी और बच्चो को डांट चूका था बुरा भला कह चूका था.
इस वजह से उसके मित्र और पड़ोसी उसे हमेशा टाल देते थे.
इन्ही सब बातों की वजह से उसके माता पिता बहुत परेशान रहते थे और उसके माता-पिता ने कई बार उसको सलाह भी दी समझाया की उसको अपने गुस्से पर काबू रखना चाहिए और प्यार से अपनी ज़िन्दगी को आगे बढ़ाना चाहिए और दुर्भाग्य से उनके सारे प्रयास असफल रहे.
आखरी में लड़के के पिता के दिमाग में एक ख्याल आया और अपने बेटे से कहा की जब भी तुम्हे गुस्सा आने लगे तो तुम एक कील बाड़ पर थोक देना जिससे उसका गुस्सा चला जाएगा और उस बच्चे को ये बात सुन के बड़ा मज़ा आया और अपने पिता की बात मान ली.


तो जब भी उसे गुस्सा आता वो बाड़ की तरफ जाता और एक कील थोक देता और उसके गुस्से की वजह से उसने पहली बार में ही 30 कील थोक दी और कुछ दिन के बाद बाड़ पे ठोकी गई कील की संख्या आधे से कम होने लगी और उस लड़के को हतोड़े के साथ कील ठोकने में मुश्किल होने लगी और फिर उसने अपना गुस्सा control में रखने का निर्णय लिया और इस वजह से धीरे-धीरे बाड़ में ठोकी गई कीलों की संख्या और भी कम होती गई और एक दिन ऐसा भी आ गया जब कोई भी कील नहीं ठोकी गई क्यूंकि उसे गुस्सा ही नहीं आया अगले कुछ दिनों में भी उसे गुस्सा ही नहीं आया और उस दिन से उसे कोई भी कील या हतोड़ी को उठाने की जरुरत ना पड़ी.
अब वह अपने पिता जी के पास गया और उन्हें अपनी बात बताई उसके बाद उसके पिता जी ने उससे कहा की अब जब भी उसका गुस्सा नियंत्रण में रहेगा तब वह बाड़ में लगे सारे कीलों को निकालेगा.
कई दिन बीतने के बाद लड़के ने बाड़ में लगे सारे कीलों को निकाल दिया और उसमें से बहुत सारे कील थे जो वह ना निकाल पाया.
लड़के ने अपने पिता को इसके बारे में भी बताया तो पिता ने लड़के को कहा की तुम्हे वहां क्या दीखता है.
लड़के ने कहा की बाड़ में एक छेद.
पिता ने कहा ये तुम्हारा गुस्सा था जो तुमने लोगो पे उतारा तुम कीलो को तो निकाल सकते हो लेकिन बाड़ में लगा छेद तो हमेशा रहेगा और बाड़ अब कभी भी पहले जैसा नहीं दिखेगा उसके ऊपर अब तो निशान पड़ चुके है और कुछ कीलों को तो बाहर भी नहीं निकाल सकते.
तुम एक चाकू के साथ एक आदमी पर वार कर सकते हो और बाद में माफ़ी भी मांग सकते हो लेकिन वो घाव तो हमेशा के लिए ही रहेगा ठीक उसी तरह तुम्हारा गुस्सा और गुस्से में कहे गए शब्द बुरे शब्द का प्रयोग शारीरिक तुलना में ज्यादा दर्द देता है तो अच्छे उद्देशियों के लिए शब्दों का प्रयोग करो रिश्तों को विकसित करने के लिए उनका प्रयोग करो प्यार और अपने हिर्दय में दया दिखाने के लिए उसका ठीक से प्रयोग करो.
"तो इस कहानी से यही सीख मिलती है कि बुरे शब्द का प्रयोग जीवन भर नुक्सान ही करेगा तो हमारे शब्द हमेशा दयालु और मीठे होने चाहिय".



                                                कहानी 2 - दादा जी की मेज 

एक कमजोर बूढ़ा आदमी अपने बेटे, बहु और चार साल पोते के साथ रहने के लिए चला गया ।
उस बुजुर्ग आदमी के हाथ कांपने लगे थे, उसकी नज़रें भी धुंधली पड़ गईं थी, और उसका कदम लड़खड़ा ने लगा था ठीक से नहीं चल पाता था.
एक रात परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर खाना खा रहे थे।
लेकिन बुजुर्ग दादा के अस्थिर हाथों और नाकाम नजर ने खाने को मुश्किल बना दिया.
जब वे खाना खा रहे थे तो गलती से उन्होंने समझा की पानी का ग्लास रखा है और जब वे उसे उठाने चले उनके कांपते हाथ की वजह से दूध का गिलास फर्श पर गिर गया, और वह टूट गया.
बेटा और बहु यह देख गुस्साए और इस वजह से दोनों की आपस में चिढ़ हो गई.
दादा ने कहा, "बेटा. माफ़ करना गलती से दूध का ग्लास फर्श पर गिर गया
"तो पति और पत्नी अपने पिता से अलग कोने में एक छोटी सी मेज सेट कर ली ।
वहीं, दादा ने अकेले ही खाया.
परिवार के सभी सदस्यों ने दादा जी को छोड़ कर एक साथ बैठ कर खाने का आनंद लिया जबसे दादा ने एक डिश तोड़ी थी. तबसे उनका खाना एक लकड़ी के बर्तनों में परोसा गया।
दादा के निर्देशन में जब परिवार नजर आया तो कभी-कभार उनको बहुत उदासी हुई और उनकी आँख से आँसू भी गिरे वह अकेले बैठ कर खाना खाते थे.
लेकिन ये सब वह चार साल की उम्र  का बच्चा यह सब खामोशी से देख चुका था.
खाने से पहले एक शाम, पिता अपने बेटे को फर्श पर लकड़ी के खिलोने के साथ खेलता देखा ।
वह बच्चे को मिठाई देते हुए पूछा, "तुम क्या कर रहे हो?" बच्चे ने मीठा खाते हुए, बच्चे ने जवाब दिया, "ओह, मैं


आपके और मां के लिए एक छोटी कटोरी बना रहा हूँ जब मैं बड़ा हो जाऊंगा तब भोजन खाने के लिए इसी बर्तन में सबको खिलाऊंगा. " चार वर्षीय बच्चा मुस्कुराया और वापस खेलने चला गया ।
ये शब्द सुनकर उसके माता-पिता हक्के-बक्के रह गए ।
फिर वह दोनों सोच में पड़ गए पर उनकी आँखों में भी आंसू निकले।
हालांकि उसके बच्चे ने कोई शब्द नहीं बोला , बस इतनी सी ही अपने बच्चे की बात को सुनकर दोनों की आँखे खुल गई की वे कितना गलत कर रहे थे.
उस शाम पति ने दादा का हाथ थाम लिया और धीरे से उसका नेतृत्व वापस परिवार की मेज पर कर दिया.
तब सबने एक साथ मिलकर परिवार के साथ बैठकर भोजन किया ।
किसी कारण से ना तो पति और ना ही पत्नी ने आपस में ऐसी किसी बात को लेकर झिक-झिक की.
अब जब दूध गलती से गिर गया था , टेबल के लिए एक कपड़ा नेपकिन दाल दिया गया।
बच्चें जैसा देखते है जैसा सुनते है वैसा ही महसूस करते हैं और वैसा ही करते है ।
वे हमें देखते है वैसा ही बन जाते है तो इसलिए बच्चो के सामने एक खुशहाल घर का वातावरण होना चाहिए.
परिवार के सदस्ये जैसा करेंगे वे वैसा ही अपनाएंगे, वे अपने जीवन के बाकी के लिए है कि दृष्टिकोण की नकल करेंगे । क्योंकि बच्चे हमारा भविष्य है.
"सकारात्मक सोच के साथ जीवन में लोगों को अपने साथ जोड़े, और खुद को नकारात्मत सोच से दूर रखें।
बड़े बुजुर्गों का सम्मान करें अपने आप को और उनको प्यार करो उनका ख्याल रखो, आज और हर रोज़!"



                                          कहानी 3 -जीवन में संघर्ष जरूरी है.

एक आदमी को तितली का एक कोकून मिला ।
और उसने देखा की वह कैसे संघर्ष कर रही है उससे निकलने की; वह बैठ गया और कई घंटे के लिए उसे देखता रहा
कैसे तितली उस छोटे से छेद के माध्यम से अपने शरीर को मजबूर संघर्ष करके बाहार आ रही है ।
फिर उसने देखा और अचानक से तितली ने कोशिश करना बंद कर दिया ।
इसके बाद उस शख्स ने तितली की मदद करने का फैसला किया, इसलिए उसने कैंची से एक जोड़ी ली
और कोकून के बचे हुए bit को कतरने की कोशिश की तितली को आसानी से उभारने के लिए लेकिन वह रुक गया और और उसे देखने लगा यह एक सूजन शरीर और छोटा, सूखा पंख था ।
आदमी को तितली देखना जारी रखा क्योंकि उसे उंमीद है कि, किसी भी पल, पंख बड़ा होगा.
लेकिन वह सोचने लगा की अगर न हुआ तो! ,एक सूजन शरीर और सूखा पंख के साथ चारों ओर तितली अपना बाकी जीवन रेंगते हुए कैसे बिताएगी. यह कभी उड़ नहीं पाएगी ।
उसकी दयालुता और जल्दबाजी में इस आदमी को ये समझ में नहीं आया कि कोकून से तितली को बाहार आने के लिए संघर्ष के लिए आवश्यक प्रतिबंधित टिनी खोलने के माध्यम से शरीर से तरल पदार्थ के लिए मजबूर कर रहे थे.
प्रकृति की तरह अपने पंखों में तितली इस उड़ान के लिए तैयार हो जाएगी बस एक बार वह कोकून से अपनी स्वतंत्रता हासिल करले ।
कई बार हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज़ होती है जिसकी हमे सच में ही आवशयकता होती है अगर बिना संघर्ष के हमे कुछ ऐसे ही मिलने लगा तो हम तो अपंग के सामान माने जाएंगे तो बिना संघर्ष बिना मेहनत के उतने मजबूत नहीं बन सकते जितनी हमारी क्षमता है, इसलिए जीवन में कभी भी कठिन समय का सकारात्मक तरीके से सामना कीजिये इससे वो आपको कुछ सिखा जाएगा जो आपकी जिंदगी की उड़ान को और भी अच्छा बना देगा.


एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

Friday, 7 September 2018

प्रेरणा दायक कहानी short stories in hindi

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अगर आप बच्चो के लिए ढूंड रहे है panchtantra ki kahaniya in hindi या panchatantra stories in hindi या फिर bachon ki kahaniyan in hindi तो आप सही जगह पर है आपको यहाँ kahaniya in hindi और story in hindi for kids या इसके अलावा very short hindi moral stories आप इस post में read कर सकते है.



                                                  कहानी 1 :- माँ

एक बार एक बच्चा जन्म लेने वाला था और कुछ समय पहले उस बच्चे ने भगवान् से पुछा, अभी तो में इतना छोटा हूँ खुद कुछ कर भी नहीं पता तो आप मुझे धरती पर भेजने वाले है में वहां रहूँगा कैसे  मुझे कहीं नहीं जाना मुझे अपने पास ही रहने दे.
"तो भगवान् बोले, मेरे पास न बहुत सारे फ़रिश्ते है और पाता है मेने उन मे से एक फ़रिश्ता तुम्हारे लिए प्यारा फ़रिश्ता चुना है और वो तुम्हारा बहुत अच्छे से ख्याल रखेगा".
बच्चा बोला :- आप मुझे एक बात बताओ में यहाँ स्वर्ग में कुछ नहीं करता बस गाता और मुस्कुराता हूँ और मेरे लिए खुश रहने के लिए बस इतना ही बहुत है.
भगवान् बोले :- बच्चे मेने जो आपके लिए फ़रिश्ता चुना है न वो आपके लिए गायगा भी और मुशकुराएगा भी और तुम उसके प्यार को महसूस भी करोगे और खुश रहोगे.
बच्चा बोला :- अच्छा तो एक और बात बताओ की जब में वहा बोलूँगा तो सब समझेंगे कैसे और मुझे तो उनकी भाषा भी नहीं आती.


भगवान् बोले :- जो आपका फ़रिश्ता होगा न वो आपको बता देंगे और सबसे सुंदर और मीठे शब्द तुमने कभी सुना होगा, और बहुत धैर्य और देखभाल के साथ, अपका जो फ़रिश्ता होगा आपको सिखा देगा कैसे बोलना है".
बच्चा बोला :- अगर मुझे आपसे बात करनी होगी तो में कैसे करूँगा.
भगवान् :- " भगवान ने बच्चे पर मुस्कुराते हुए कहा, "आपका फरिश्ता आपको सिखा देगा प्रार्थना कैसे करते है और इस तरह आप मुझसे बात कर पाओगे."
बच्चा बोला :- "मैने सुना है पृथ्वी पर बुरे लोग रहते है । मेरी रक्षा कौन करेगा?
भगवान :- "आपके फ़रिश्ता आप की रक्षा करेगा, भले ही उसको अपना जीवन खतरे में क्यूँ ना डालना पड़े"
बच्चा बोला :- "लेकिन मैं हमेशा दुखी हो जाऊंगा जब  आपको याद करूँगा और जब में आपको नहीं देख पाऊंगा".
भगवान् :- "आपका फरिश्ता हमेशा मेरे बारे में बात करेगा और वापस मेरे पास कैसे आओगे ये भी बताएगा, लेकिन फिर भी मैं हमेशा आप के साथ रहूँगा."
उस समय स्वर्ग में बहुत शांति थी, लेकिन पृथ्वी से पहले से ही आवाज आ रही थी और बच्चा समझ गया था की उसके जाने का वक्त आ गया है.
जल्दी में बच्चे, धीरे से पूछा, "हे भगवान, अब तो जाने वाला हूँ कृपया मुझे मेरे फ़रिश्ते का नाम तो बताओ.
" परमेश्वर ने उत्तर दिया, आपके फ़रिश्ते के नाम का कोई महत्व... नहीं है आप बस इतना जान लो की आप उसे माँ! कहकर पुकारोगे.




                                             कहानी 2 आदर्श माँ

एक मां बतख और उसके छोटे बच्चे  थे. एक दिन वह कही जा रहे थे और उन्हें रास्ते पर झील दिखाई दी।
बच्चे उस झील को देख बहुत खुश थे और अपनी मां के पीछे-पीछे क्वेक-क्वेक करते जा रहे थे।
अचानक से मां की नज़र एक लोमड़ी पर पड़ी और वह चिल्लाइ और डरी हुइ थी और बोली, "बच्चों, जल्दी करो वहां एक लोमड़ी है जो हमारी तरफ ही आ रहा है जल्दी से झील की तरफ जाओ!
अब मां बतख ने सोचा कि क्या करना है।
वह जमीन पर एक पंख रगड़ते हुए आगे-पीछे चलने लगी.
जब लोमड़ी ने उसे देखा तो वह खुश हो गया और उसने खुद से कहा, "ऐसा लगता है कि जैसे उसे चोट लगी है और उड़ नहीं सकती! मैं आसानी से पकड़ कर उसे खा सकता हूँ! और उसकी ओर भागा
मां बतख दौड़ी, और लोमड़ी को विपरीत दिशा में ले गई ।
उसने अपने बच्चों की ओर देखा... और देखा कि वे झील के पास पहुँच गए थे. तब उसे राहत मिली , इसलिए वह रुक गई और एक गहरी साँस ली.
लोमड़ी ने सोचा कि वह थक गई है  और वह करीब आया , लेकिन मां बतख जल्दी से उसके पंख फैलाकर और हवा में ऊपर उठकर वह झील के बीच में उतरी और उसके बच्चे भी उसके पास पहुँच गए.
लोमड़ी मां बतख को और उसके बच्चों को देखता रह गया । वह उन तक नहीं पहुंच सका क्योंकि वे झील के बीच में थे ।
"तो बच्चों की सुरक्षा ही माँ की पहली जिम्मेदारी है".



                                                   कहानी 3:- सच्ची सम्पति

एक बार बहुत धनी सेठ अपने बेटे को देश की यात्रा पर ले के गए वो अपने बेटे को दिखाना चाहते थे की वो कितना भाग्यशाली है की उसका जन्म एक अमीर परिवार में हुआ है. अगर वो गरीब होता तो कैसे गरीब लोग रहते वह अपने बेटे को दिखाना चाहता था.
उन दोनों ने एक रात बहुत ही गरीब किसान परिवार के साथ बिताया जो अपना जीवन यापन खेती कर के करते थे।
यात्रा से लौटने पर पिता ने अपने बेटे से पूछा, "यात्रा कैसी थी?"
बेटे ने कहा "यह बहुत अच्छा था, पिताजी ।
सेठ "क्या तुमने देखा कि गरीब लोग कैसे हो सकते हैं? कैसे वो अपना जीवन यापन करते है?"
बेटे ने कहा "हाँ पिता जी"।
सेठ "तो तुमने यात्रा से क्या सीखा? ''
बेटे ने जवाब दिया, "मैंने देखा कि हमारे पास एक कुत्ता है और उनके पास चार थे ।
हमारे पास एक नहाने का पूल है और उनके पास बड़ा सा तालाब है जिसका कोई अंत नहीं है ।
हमने लालटेन खरीदा है जिसकी रोशिनी हमारे आँगन तक पहुँचती है और उनके पास रात में चमकते तारे है.
हम एक छोटे से भूमि पर घर बना के रहते है जब की उनके पास खेत है|
हमारे पास नौकर है जो हमारी सेवा करते है,लेकिन वे दूसरों की सेवा करते है.
हम अपने भोजन खरीदते हैं, लेकिन वो पैदा करते है.
हमारे चारों ओर हमारी दीवारें है हमारी संपत्ति की रक्षा करने के लिए लेकिन उनके पास उनकी रक्षा करने वाले उनके मित्र हैं. "
लड़के के पिता ये सब सुनकर अवाक रह गए ।
फिर उसके बेटे ने कहा, "मुझे दिखाने के लिए धन्यवाद पिताजी कितने गरीब है हम! "

एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.



बच्चों की कहानी story in hindi

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अगर आप बच्चो की kahaniya पढ़ना चाहते है और hindi me kahani या baccho ki kahaniya तो आप वो भी पढ़ सकते है इसके आलावा story for kids in hindi या hindi kahaniyan for child और motivational story in hindi या फिर hindi me kahani आप इस पोस्ट में पढ़ सकते है.



                                            कहानी 1 :- दानवीर पेड़

काफी समय पहले एक बहुत बड़ा, ऊँचा और हरा-भरा सेब का पेड़ था. उसकी शाखाएं लम्बी और मोटी थी उसके अनगिनत चमकीले पत्ते हवा के झोंके से लहराते थे दूर-दूर से पंछी आते और उस पर बैठते थे पेड़ बहुत ही खूबसूरत और खुशहाल था.
हर रोज उस पेड़ के पास एक लड़का आता था और उससे उस पेड़ की दोस्ती भी हो गई थी.
वो हर रोज स्कूल से आने के बाद उस पेड़ से मिलने आता पेड़ के फल खाता और साथ में लुका-छुपी भी खेलता वह अपनी सारी बात उस पेड़ को बताता.
पेड़ उस लड़के की बात बड़ी ध्यान से सुनता और उसके साथ हस्ता और वो आपस में एक दुसरे को बहुत अच्छी तरह से समझते थे इस वजह से उन दोनों का रिश्ता आपस में और गहरा हो गया.
वह लड़का उस पेड़ के साथ खूब मस्ती करता उसकी शाखाओं को पकड़ के झुला झूलता उस पेड़ के पत्तों का मुखुट बनाकर राजा बनता और खूब खेलता फिर थकने के बाद पेड़ की छाओं में सो जाता.
कुछ समय बाद जब लड़का बड़ा हो गया तो वह पेड़ के साथ कम अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताने लगा और धीरे-धीरे पेड़ के पास जाना भी बंद कर दिया.
पेड़ अकेला पड़ गया और उसकी राह देखने लगा वह पेड़ उस लड़के के साथ बिताए हुए हर पल को याद करके खुश होता.


एक दिन लड़का उस पेड़ से मिलने आया और पेड़ उसे देख कर बहुत खुश हुआ और जैसे जैसे लड़का पेड़ के करीब आने लगा पेड़ की धड़कने बड़ने लगी और बोला आओ प्यारे दोस्त ! बहुत दिनों बाद आए हो चलो कोई बात नहीं अब मेरे शाखाओं को पकड़ के झूलो फल खाओ मस्ती करो और खुश हो जाओ.
लड़का :- अब में बड़ा हो गया हूँ और तुम्हारी शाखाओं से नहीं झूल सकता.
पेड़ :- दोस्त डूबता हुए सूरज को देखो तुम्हे अच्छा लगता है न.
लड़का :- में अब बहुत busy हो गया हूँ मुझे अब बहुत कुछ करना है दुनिया देखनी है.
पेड़ :- तुम इतना दुखी क्यूँ हो.
लड़का :- मुझे पैसों की जरुरत है हमारी दुनिया में खुश रहने के लिए पैसे लगते है.
पेड़ :- में तुम्हे दुखी नहीं देख सकता माफ़ करना मेरे पास पैसे नहीं है लेकिन तुम एक काम करो मेरे पेड़ के सारे फल ले जाओ और बाजार में बेच दो उससे तुम्हारे पास पैसे भी आ जायेंगे.
लड़का :- ख़ुशी से ! सच में दोस्त के में ये फल ले जाऊं.
पेड़ :- हां ! ले जाओ और अब तो टतुम खुश हो न.
लड़का :- हाँ ! दोस्त तुम कितने अच्छे हो और पेड़ के ऊपर चढ़ा सारे फल तोड़ कर बाजार चला गया.
पेड़ को लड़के की मदद करके बहुत ख़ुशी हुई.
काफी दिन बीत गए और लड़का नही आया और पेड़ बहुत उदास हुआ अकेला महसूस करने लगा साल बीतता गया पंछी आते बैठते चेह्कते और उड़ जाते और पेड़ लड़के के आने का इंतज़ार करता.
एक दिन लड़का वापस आया और उसे देख पेड़ खूब खुश हुआ.
पेड़ :- आओ दोस्त आओ ! तुम्हे देख कर मुझे बहुती ख़ुशी हुई और मेरे साथ मस्ती करो.
लड़का :- में अब बहुत बडा हो गया हूँ मेरी शादी हो गई है मेरे बीवी बच्चे है.
पेड़ :- हाँ तुम बड़े तो हो गये हो लेकिन तुम खुश नहीं दीखते क्या हो गया की दिक्कत.
लड़का :- में अपने परिवार को खुश देखना चाहता हूँ सुखी और सुरक्षित रखना चाहता हूँ मेरे पास उनके लिए घर नहीं है.


पेड़ :- उसके दुःख को देख के बोला दोस्त मेरे पास घर नहीं है मगर ये जंगल ही मेरा घर है तुम मेरी शाखाएं काट कर  ले जाओ तुम्हारा घर बन जाएगा फिर तो तुम्हे ख़ुशी मिलेगी न.
लड़का :- पेड़ पे चढ़ा और उसकी साड़ी शखाएं काटी और ले गया.
पेड़ को उसकी मदद करके ख़ुशी मिली और लड़का कई दिन बीत जाने के बाद भी उससे मिलने नहीं आया.
पेड़ फिरसे उदास हो गया फिरसे सब कुछ वही और अब तो पेड़ पंछियों से भी बातें नहीं करता और वो भी पेड़ का चक्कर लगतीं और उड़ जाती और पेड़ पर ज्यादा शखाएं भी नही थी जिस पर पंछी बैठते और उड़ जाते और पेड़ पंछियों से लड़के के बारे में पूछता लेकिन कोई जवाब ना मिलता पेड़ अब और अकेला हो गया था बस वह उस लड़के का इंतज़ार करता पेड़ ने शहर को बदलते देखा बहुत कुछ बदल गया था हरे-भरे खेतों को हटा कर वहाँ अब बड़ी-बड़ी इमारतें और पक्की सड़के बन गई थी और पेड़ों को काटकर वह टावर लगाए गए लोगो की आबादी बड़ने के कारण जंगलों को नष्ट करके वहां बद्स्तिया बनाई गई थी जंगल की हरियाली खत्म हो गई थी पेड़ कुछ नहीं कर सकता था वह भी बहुत कुछ खो चूका था क्यूंकि वो तो सिर्फ एक पेड़ था वह बहुत अकेला पड़ गया था लेकिन फिर भी वह उस लड़के का इंतज़ार करता था और एक दिन आखिरकार लड़का वापस मिलने आया और वो अब आदमी बन गया था और पेड़ उसे देख कर इतना खुश हुआ की कुछ कह न सका लेकिन लड़के के चेहरे पर उदासी थी और वह उस पेड़ के साहारे नीचे बैठ गया और रोने लगा और उसे रोता देख पेड़ से देखा न गया और वह भी दुखी हो गया और पेड़ की शखाएं ना होने के कारण उसे सिखला ना सका और ना हीं उसे खुश करने के लिए उसे फल खिला पाया.


पेड़ :- उदास हो कर! क्या बात है दोस्त क्यों रो रहे हो?
लड़का :- मेरी बीवी मुझे छोड़कर चली गई मेरे बच्चे अब मेरा ख्याल नहीं रखते और में ऐसी जगह नहीं रहना चाहता जहाँ प्यार ना हो में बस यहाँ से कहीं दूर जाना चाहता हूँ.
पेड़ :- तुम हमेशा खुशियों के पीछे भागते रहे दोस्त तुम कही मत जाओ देखना खुशियाँ लौटकर वापस तुम्हारे पास आएंगी.
लड़का :- यहाँ कोई खुशियाँ नहीं है में बस एक नाव बनाना चाहता हूँ जिसमे बैठ कर में सैर करु इस चमकीले पानी में और लेट कर सूरज की धुप सेंकू.
पेड़ :- ऐसा करके तो तुम्हे ख़ुशी मिलेगी न.
लड़का :- हाँ ऐसा करके मुझे सुख और शांति मिलेगी.
पेड़ :- तो फिर मेरा तना काटकर नाव बना लो और पानी में सैर करो.
लड़का :- ओ प्यारे दोस्त तुम कितने अच्छे हो.
लड़का औजार लेकर आया और पेड़ काटना शुरू किया और उसने नाव बनाइ और उसे थोड़ी राहत मिली और उसकी मदद करके पेड़ को बहुत ख़ुशी मिली और पेड़ उसे नाव बनाते और उस पर बैठ कर उसे जाते देख रहा था.
लड़का तो खुश हुआ लेकिन पेड़ फिर से दुखी हुआ और फीसे अकेला पड़ गया उदास हो गया और वह अब बस लड़की का टुकड़ा बनकर रह गया समय बीतता गया और अब वह पेड़ बड़ी इमारतों की वजह से डूबता सूरज और नाही पहाड़ देख पाता था उसकी उंचाई काटने की वजह से वो कोई घर या बस्ती देख पा रहा था बस वह एक मात्र जमीन पर टुकड़ा बनकर रह गया और अब तो पंछी भी पास नहीं आते और वो हरे भरे खलियान नहीं देख पाता था अपने आस-पास खुशिहल जगह को खो दिया लेकिन वह उस लड़के को याद करता उससे सबसे ज्यादा यद् उस लड़के की ही आती शहर अब और बदल चूका था और लड़का भी बुडा हो गया था और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और वो लाठी के सहारे झुक कर चलता था और सोच रहा था की वो पेड़ मिलेगा की नहीं और चलता गया की अचानक उसे वह पेड़ मिल गाया और पेड़ भी उसका इन्तेजार कर रहा था.
पेड़ :- तुम आ गए मेने तुम्हारा बहुत इंतज़ार किया है.
लड़का :- हाँ दोस्त तुमसे मिलकर मुझे अच्छा लगा सुकून मिला में दुसरे शहर गया था वह कुछ साल रहा और खाँसने लगा..


पेड़ :- तुम तो ठीक से सां भी नहीं ले पाते.
लड़का :- हाँ इस प्रदुषण ने तो हालत खराब कर दी है.
पेड़ :- माफ़ करना मेरे प्यारे दोस्त मेरे पास तुम्हे देने के कुछ भी नहीं है और मुझ पर तो अब फल भी उगते.
लड़का :- मेरे दांत कमजोर है में फल नहीं खा सकता.
पेड़ मेरी शाखाएँ भी नहीं रही जिससे तुम झूल सकते थे.
लड़का :- अब में बूड़ा हो गया हूँ झूल भी नहीं सकता.
पेड़ :- मेर ताना भी नहीं रहा तुम तो अब मेरे ऊपर .....
लड़का :- मुझमे अब ताकत नहीं रही मेरे कमर में भी अब दर्द होता है.
पेड़ ने राहत की सांस ली और बोला काश में तुम्हे कुछ दे पाता लेकिन अब मेरे पास कुछ भी नहीं बस एक लकड़ी का टुकड़ा रह गया हूँ.
हरे भरे जंग गायब हो गए है ये concrete हमे ताज़ी हवा नहीं दे सकते पर पेड़ दे सकते है ये इमारते हमे सुकून नहीं दे सकती ये इंसान इतना स्वार्थी केसे हो सकता है यर factory, miles इतना प्रदुषण फैला राहे है क्या लोग प्रकृति के नियम को भूल गए है क्या.
पेड़ चुप रहा वो कुछ नहीं बोला.
लड़का :- में बुडा हो गया हूँ मुझसे ज्यादा देर खड़ा नहीं हुआ जाता थका थका रहता हूँ मुझे सांस लेने के लिए तजि हवा चाहिए और एक शान्त जगह बैठने के लिए.
पेड़ :- खुश हुआ और खुद को सीधा किया और बोला! बस इतनी सी बात अरे ! ये पूराना लकड़ा बैठने और आराम करने के लिए बहुत है आओ दोस्त बैठ जाओ और थोडा आराम कार लो.
लड़का :- बैठ गया और उसने गहरी सांस ली और उसने चमकीले पानी में सूरज में डूबते हुए देखा और हवा के झोंके को महसूस किया और बोला तुम बहुत खुश नसीब हो दोस्त तुम्हे अच्छे नज़ारे देखने को मिलते है जैसे सूरज हवा का झोंका और चमकीला पानी.
दोनों आपस म खूब बाते करते रहे.
प्रकृति का रिश्ता हमेशा से मानव से रहा है हमे धरती माँ की रक्षा और उनका आदर करना चाहिए और याद रखे जितनी हमे पेड़ों की जरुरत है उतनी ही उतनी ही पेड़ों को भी हमारी जरूरत है.
जहाँ शुरक्षित जंगल है वहां प्रकृति भी शुरक्षित है. 



एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.

Thursday, 6 September 2018

बच्चों की नई कहानी kahaniya in hindi

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अगर आप बच्चों के लिए नई कहानिया ढूंड रहे है तो आप यहाँ bachon ki kahaniyan in hindi और baccho ki kahaniya या child story in hindi में पढ़ सकते है इसके आलावा आपको hindi panchatantra stories और moral stories in hindi भी मिल जाएंगी और short stories in hindi या story for kids in hindi भी आप यहाँ read कर सकते हो बच्चो को बहुत पसंद आएंगी.


                                               कहानी 1 :- प्यासा कौवा


गर्मी के दिन चल रहे थे , एक प्यासा कौवा पानी की तलाश में सभी खेतों में उड़-उड़ कर पानी खोज रहा था .
वो पानी खोज-खोज के थक चुका था लेकिन उसे पानी नहीं मिला वो लगभग अपनी सारी उम्मीद छोड़ चूका था.
तभी अचानक, उसने नीचे एक पानी का सुराही देखा ।
वह सीधे नीचे गया ये देखने के लिए की उसमे पानी है की नहीं।
उसने जग के अंदर कुछ पानी देखा वो खुश हो गया!
कौए ने अपने  सिर को जग में डालने की कोशिश की लेकिन अफसोस की बात है,
जग की गरदन काफी पतली थी उसको अपना सर अन्दर डालने में दिक्कत हो रही थी और
पानी काफी नीचे था इसकी वजह से वो पानी तक नहीं पहुँच पा रहा था.
कौवा थोड़ी देर के लिए परेशान हो गया फिर उसने चारों ओर देखा, उसने कुछ कंकड़ देखे जो जमीन पर पड़े थे। अचानक उसके दिमाग में एक विचार आया। उसने एक के बाद एक कंकड़ को उठाकर, जग में डालने लगा।
अब पानी धीरे-धीरे ऊपर आने लगा था .
कौए की मेहनत रंग ला रही थी.
बहुत जल्दी ही पानी घड़े के ऊपर आ गया और कौए ने अपनी प्यास बुझा ली.
"अगर आप मेहनत की कोशिश करोगे तो जल्दी ही आप की समस्या का हल होगा"



                                     कहानी 2 :-  ग्वालिन 

एक ग्वालिन थी और वो गाय का दूध बेचती थी। एक दिन वह बाजार जा रही थी और उसके सिर के ऊपर दूध की सुराही राखी हुई थी जिसमे दूध भी था|
वह जाते-जाते रास्ते में सोचने लगी सब बातें वह बेचने के बाद कर सकती थी के सपने को शुरू किया की में दूध बेचूंगी उससे जो पैसे आएँगे "उस पैसे के साथ", में दूकान से मुर्गियां खरीदूंगी और वो मुर्गियां रोज अंडे भी देंगी और फिर उन अन्डो को बाजार में बेच दूंगी इससे में और भी पैसे कमा लुंगी.
ऐसा कह के वह अब ये सोचने लगी की अब उन "पैसों का क्या करूंगी', "सोचती हूँ","सोचती हूँ" हाँ उन "पैसों से में अपने लिए कपड़े और टोपी भी खरीद लुंगी और जब में उनहे पहन कर बाहर जाउंगी तो सब मुझे ही देखंगे" ऐसा सोच सोच के वह चलती गई और इन खुश विचारों के साथ, वह मटकी छोड़ और कूदने लगी।
उसके कूदने से सुराही सर से नीचे जमीन पर गिर गई और सुराही टूट गई और सारा दूध जमीन पर गिर गया और वह जमीन पे बैठ कर रोने लगी और घर वापस गई और अपनी माँ को सारी बातें बताई.
"जब तक हाथ में कुछ हो नहीं तब तक उस बात का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए".



                                        कहानी 3 :- पेंसिल के दृष्टांत

एक बार एक पेंसिल बनाने वाला था जो अपनी बनाई हुई पेंसिल से बाते करना चाहता था. उसने कहा की में तुम्हे बॉक्स में डालने से पहले.।
उसने पेंसिल से कहा, "इससे पहले कि मैं तुंहें दुनिया में भेज रहा हूँ, "में तुम्हे 5 चीजें बताने जा रहा हूँ जो तुमको पता होनी चाहिए , जिससे की तुम बहुत ,महान pencil बन पाओगी"  ।
एक: "अपने आप को किसी के हाथ में जाने की अनुमति दो तो तुम कई बड़े काम करने में सक्षम हो जाएगी, लेकिन केवल अगर तुम अपने आप को किसी को अपने हाथ में पकड़ने डौगी तो''.
दो: "तुम एक दर्दनाक अनुभव होगा समय-समय पर पैनापन करना पड़ेगा, लेकिन तुम इसे एक बेहतर बनने के लिए की आवश्यकता होगी
तीन: "तुमसे गलतियाँ भी हो सकती है लेकिन तुम उसे ठीक भी कर सकती हो क्यूंकि pencil के पीछे रब्बर होती है और उससे साफ़ किया जा सकता है"
चार: "तुम्हारा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तुम्हारे अंदर है."  ("pencil का सिक्का")
पांच: "चाहे कोई भी हालात हो तुम्हे लिखना है बस लिखना है, तो तुम अपनी छाप छोड़ देना। कोई फर्क नहीं पड़ता कोई भी शर्त हो, तुम लिखना जारी रखना. "
पेंसिल समझ गइ और याद करने का वादा किया, और उसके दिल में उद्देश्य के साथ बॉक्स में चली गइ ।


अब पेंसिल की जगह अपने साथ रख ले । हमेशा उंहें याद है और कभी नहीं भूलना, और तुम सबसे अच्छा व्यक्ति बन जाओगे ।
एक: "भगवान् कह रहे है आप कई महान काम करने में सक्षम हो जाएंगे, लेकिन केवल अगर तुम अपने आप को भगवान में आयोजित होने की अनुमति दे तो" जब तक हम अपनी ज़िन्दगी परमेश्वर के हाथ नही देते है तो हमारी ज़िन्दगी किस काम की है. जैसे pencil बनाने वाले ने कहा था की जब तक pencil को कोई उठा के लिखता नहीं है तब तक pencil किसी काम की नहीं है उसकी तरह से जो हमारी ज़िन्दाही है जब तक हम अपनी जिंदगी भगवान् के हाथ नहीं देते तो हमारी जिंदगी भी किस काम की है.
तो खुद को भगवान् के हाथो में देदो और भी अच्छा होगा शयद आपने बहुत से गुण हो लेकिन अगर आप भगवान् के साथ मिलकर काम करोगे तो और भी अच्छे से कर पाओगे.

दो: "अगर आप ताकतवर बनना चाहते हो तो समय-समय पर एक दर्दनाक तेज का अनुभव होगा. आपको भी pencil की तरह छीला जाएगा जीवन में समस्या आएंगी, और ये सब जरूरी भी है इससे आपको सीख मिलेगी एक मजबूत व्यक्ति बनने के लिए आवश्यकता होगी । जिस तरह से pencil को छीलना पड़ता है अच्छी तरह से लिखने के लिए उसी तरह से हमारी ज़िन्दगी में भी मुश्किलें आती है परेशानिया आती है जिससे की हम और मजबूत बन सके और अच्छे इंसान बन सके. और जब मुश्किलें आपकी ज़िन्दगी में आएंगी तो आपने घबराना नहीं है उस मुश्किलों का सामना करना है हारना नहीं है और उनसे कुछ सीख लेनी है और जब आप उन मुश्किलों से कुछ अच्छा सीख लोगे तो आप देखोगे की आप अपनी ज़िन्दगी में और अच्छे से आगे बड़ पाओगे.

तीन: "भगवान् कह रहे है की आप गलती कर सकते है लेकिन उन्हें तुम सही भी कर सकते हो और अगर ठीक नहीं कर सकते हो तोह उनसे कुछ सीख सकते हो और आगे बढ़ सकते हो","जिस तरह से pencil के पास रबर है जिससे वह अपनी गलतियां मिटा सकती है उस तरह से हमारे पास भी रास्ते है जिनसे हम अपनी गलतियां मिटा सकते है". लेकिन पहली चीज़ ये है की हमे हमारी ego को side में रखना होगा और हमे सीखना होगा और अपनी गलती को सुधरने के लिए सॉरी कढ़ना सीखना होगा कई बार मुश्किल हो जाता है सॉरी कहना आपको लगता है सब कुछ ठीक है और आप सॉरी नहीं बोलते तो सॉरी बोलना बहुत जरुरी है. कई लोग बोल देते है दोस्ती में नो सॉरी नो थैंक you लेकिन सॉरी बोलना चाहिए जिससे की लोगो को भी लगे की हमे अपनी गलती का एहसास है. लेकिन सॉरी बोलना ही नहीं है दिखाना भी है की हाँ वाकई में आपको अपनी गलती का एहसास है तभी उस सॉरी का कुछ मतलब बनता है की सुच में आपको अपन गलती का एहसास है.


चार: "आप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आपके अंदर है हमारा दिल है हमारे सोच है ये फर्क नही पड़ता की आप बहार से कैसे चाहते किस्त्ने भी सुन्दर आकर्षण दिखे लेकिन आप अंदर से कैसे है ये इसका फर्क पड़ता है." तो हमे अन्दर से अच्छा बनना है अगर आप अन्दर से अच्छे नहीं है तो आप बाहर से चाहे कितने भी अच्छे क्यूँ ना हों लोग आपसे दूर जाने लगेंगे लेकिन अगर आप अन्दर से अच्छे है न तो आप बाहर सेव्चाहे जैसे हों लोग आपको बहुत प्यार करेंगे पसंद करेंगे क्यूंकि अन्दर की जो सुन्दरता है वो ही बाहर निकलती है वो दिखती है वो रक रौशनी की तरह है जो अन्दर से बाहर निकलती है. जिस तरह से pencil को पता है की उसके अन्दर का सिक्का ही सबसे ज्यादा important है उसी तरह आपको भी याद रखना है जो आपके अन्दर है वो सबसे important है और वो चीज आपसे कोई छींन नहीं सकता है तो आप अपने अंदर के हिस्से को जितना सुन्दर जितना चचा बना सकते हो बना दो. और वो आप कैसे करेंगे लोगो से प्यार करके भगवान् से प्यार करके लोगो से अच्छी बाते करके लोगो की मदद करके अच्छे काम करके.

पांच: "आप चाहे किसी भी हालत में हो, आपको गहरा और अच्छा निशान छोड़ देना है" भगवान् की महिमा के लिए। जिस तरह से pencil जिस शान से जहाँ भी वो लिखती है एक गहरा निशान छोड़ती है और उतने ही शान से जिसके हाथ में pencil है उसे वाह-वाह मिलती है उसी तरह से हम भगवान् के हाथों में है और हमे एक गहरा निशान छोड़ना है इस दुनिया में जिससे भगवान् की वाह-वाह हो उनका भी नाम ऊँचा उठे हमे एसे काम करने है ऐसे अच्छे काम करने है की लोग कहे की वाह.... कई लोग सोचते है की में तो एक मामूली इंसान हूँ में नहीं इतना कुछ कर सकता लेकिन याद है पहले भी एक बात बताई है की आप किसके हाथ में है भगवान् के हाथ और आप उनके साथ बहुत कुछ कर सकते है बस आपको पहले ये फैसला करना होगा की मुझे इस काम को करना ही करना है.

एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.
मजेदार कहानिया :- hindi kahani
बच्चों  के लिए मजेदार कहानी :- child story in hindi

Wednesday, 5 September 2018

बच्चो के लिए मजेदार कहानी child story in hindi

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अगर आप बच्चो के लिए मजेदार kahaniya ढूंड रहे है या खोज रहे है moral stories in hindi और baccho ki kahaniya तो आप बिलकुल सही जगह पर है यहाँ आपको story for kids in hindi और motivational story in hindi या panchatantra stories in hindi में मिल जाएगी और stories in hindi या फिर hindi kahaniyan bachon ki आप इस post के द्वारा read कर सकते हो.




                                         कहानी 1 :- चलाक लोमड़ी और सारस 

किसी जंगल में बहुत ही चतुर लोमड़ी रहती थी उसे दूसरों को पागल बनाने में बहुत मज़ा आता था सारस उस चालक लोमड़ी का मित्र था और वह बहुत सीधा साधा था. उस लोमड़ी ने सोचा क्यूँ न उसके साथ मज़ाक किया जाए एक बार उस स्वार्थी लोमड़ी ने अपने घर में सारस को रात के खाने पर आमंत्रित किया और सारस ने धन्यवाद किया और बोला में जरूर आऊंगा. सारस उस लोमड़ी के घर गया लोमड़ी ने पहले से ही योजना बना राखी थी उसने प्लाटों में soup परोसा.
लोमड़ी के लिए उस plate से soup पीना कोई मुश्किल नहीं था लेकिन सारस बेचारा वह केवल अपनी चोंच का आखरी सिरा ही soup में भिगो पाया चोंच से भला वह soup केसे पीता तो इस वजह से वह भूखा ही रहा और उसने खुद को बहुत अपमानित महसूस किया और उसको समझ आ गया की लोमड़ी ने उसका मजाक उड़ाने के लिए ही दावत पे बुलाया है और जब वह उदास हो गया तो लोमड़ी बोली! क्यों खाना पसंद नहीं आया? सारस बोला बहुत अच्छा खाना था और बोला तुम भी किसी दिन मेरे यहाँ आओ और भोजन का आनंद लो सारस इस अपमान के बाद उसने अपने मन में सोच लिया था की वह अपने इस अपमान का बदला जरूर लेगा.
दुसरे दिन लोमड़ी सारस के घर पहुँच गई और वह अपने साथ सारस को गिफ्ट में देने के लिए कुछ भी नहीं लाइ थी और उसने सोचा की में खूब जम कर खाएगी.



सारस ने भी soup त्यार किया और soup को लम्बी गर्दन वाली सुराही में परोसा और सारस ने तो अपने लम्बी चोंच से सारा soup पी गया लेकिन लोमड़ी सुराही के चारो ओर चक्कर ही लगाती रह गई और बस आईडिया ही लगाती रही के आखिर इस soup को कैसे पिया जाए और साड़ी कोशिशों के बावजूद भी वह soup ना पी पाई और उसे भी सारस की तरह भूखा ही रहना पड़ा और इस तरह बेचारे सारस ने अपने अपमान का बदला उस चतुर लोमड़ी से लिया.
"जैसे को तैसा" तो इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है की जो जैसा व्यवहार करता है उसके साथ भी वैसा व्यवहार होता है.



                                                कहानी 2 :- मेमना और भेड़िया 

एक दिन एक चोट मेमना भेड़ों के झुंड के साथ घास चराने गया था और वह बहुत शैतान था अपनी शरारत की वजह से एक दिन वह भटक गया और उसे वह घास दिखाई दि और वह उसे बहुत मज़े लेके खाने लगा और वह चोट मेमना अपने झुंड से काफी दूर आ गया था और इस बात से वह अनजान था लेकिन वह एक और बात से अनजान था एक लोमड़ी उसका पीछा कर रही थी और जब उसको एहसास हुआ की वह अपने झुंड से कही और आ गया है तो उसने वापस जाने का फैसला किया तो जैसे ही वह जाने लगा तभी उसने देखा एक भूखा चालक भेड़िया खड़ा था जो उसके सामने आ गया था अब मेंमने को यही लगने लगा की अब कुछ नहीं हो सकता भाई अब में मारा जाउगा ये मुझे खा जाएगा.
मेमने ने भेड़िये से कहा :- क्या आप मुझे खा जाओगे?
भेड़िये ने कहा :- हाँ किसी भी कीमत पर.
मेमने ने कहा :- क्या आप कुछ देर इंतज़ार कर सकते है?
भेड़िये ने कहा :- लेकिन क्यूँ?
मेमने ने कहा :- मेने बहुत सारा घास खा लिया है मेरा पूरा पेट घास से भर चूका है अगर आप मुझे अभी खा लेंगे तो आपको मज़ा नहीं आएगा आपको लगेगा की आप घास खा रहे हो तो जब तक घास पाच नहीं जाता तब तक आप इंतज़ार करें.
भेड़िया बोला :- ठीक है.
मेमने ने कहा :- धन्यवाद.
भेड़िया कुछ देर बाद मेंमने को मारने के लिए तैयार हो गया लेकिन मेंमने ने उसे फिरसे रोक दिया.
मेमने ने कहा :- प्यारे भेड़िये क्या आप कुछ और देर इन्तिज़ार कर सकते हो घास अभी तक पची नहीं है तो आप मुझे थोडा नाचने दो तो ये आसानी से पाच भी जायगा और आप मुझे खा सकेंगे.
भेड़िया :- हा ये भी ठीक है.



मेमना पागलों की तरह नाचने लगा और फिर एक दम से रुक गया.
भेड़िये ने कहा :- क्या हुआ रुक क्यूँ गए?
मेमना बोला :- में नाच नहीं पा रहा हूँ क्यूंकि कोई संगीत ही नहीं है.
भेड़िये ने कहा :- तो अब क्या कर सकते है?
मेमने ने कहा :- क्या मेरे गले में ये लटकी हुई घंटी देख रहे हो क्या आप इसको जोर से बजा सकते हो तो इससे मुझे नाचने में भी मजा आयगा और मेरे पेट में जो घास है वो भी जल्दी पच जाएगा.
भेड़िया : वह किसी भी कीमत पर मेंमने को खाना चाहता था वह कुछ भी करने को त्यार था इस वजह से वह मान गया और उसने मेमने के गले से घंटी उतार कर अपनी पूरी ताकत के साथ उसे बजाने लगा.
चरवाहा मेमने को ढूंड रहा था की अचानक उसे घंटी की आवाज सुनाई दी और वह उस घंटी को सुनते उसी तरफ चला गया और तभी उसने उस भेड़िये को मेमने के साथ देखा और बहुत जोरो से उसकी तरफ भागा और ये देख कर भेड़िया वहां से भाग गया और मेमना बच गया.
तो इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है की शारीरिक ताकत से ही सब कुछ नहीं होता कभी-कभी कमजोर लोग अपनी होशियारी से अपने दिमाग का इस्तेमाल करके ताकतवर लोगों पर काबू पा सकते है.



                                                  कहानी 3 :- लोमड़ी और अंगूर 

गर्मियों का मौसम था एक लोमड़ी तेज धुप में भूखी प्यासी जंगल में घूम रही थी और उसकी तबियत ख़राब होने की वजह से वह शिकार भी नहीं कर पा रही थी वह सोचने लगी कबसे भूकी प्यासी घूम रही काश कुछ खाने को मिल जाए और आगे चलती गई की उसकी नजर एक पेड़ पर पड़ी जहाँ अंगूरों के कुछ गुच्छे उसे दिखाई दिए और वह खुश हुई और जब वह उस पेड़ के पास आई उसने देखा की अंगूर के अंगूरों के गुच्छे बहुत ऊपर है जहा वह पहुँच नहीं पा रही थी. वह कोशिश करती है उन अंगूरों के गुच्छे को पकड़ने की और पर नहीं पकड़ पाती है वह फिर से कोशिश करती है और गिर जाती है. जब वह उनको नहीं पकड़ पाती है तो वह कहने लगती है की आरे ये अंगूर तो खट्टे है कच्चे भी है में अपना पेट ख़राब नहीं करना चाहती हुह... कौन खाएगा इन्हें.... ये तो देखने में भी अच्छे नहीं लग रहे है में इन्हें खाना ही नही चाहती ओए वह से चली जाती.
जब चीज़ लोगो को आसानी से नहीं मिल पाती तो लोग उसे ख़राब कहने लगते है लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए हमे उस चीज़ को बुरा कहने से पहले सोचना चाहिए की हमने उस चीज़ को पाने के लिए कितना प्रयास किया.
प्रयास में सफल न होने पर बहाना नहीं करना चाहिए.



एसे ही और भी कहानी पढने के लिए.
मजेदार कहानिया :- hindi kahani

Tuesday, 4 September 2018

पंचतंत्र कहानी kahaniya in hindi

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अगर आप खोज रहे है panchatantra kahaniya या panchatantra stories in hindi तो आप इस post में जरुर पढ़ सकेंगे और baccho ki kahaniya या child story in hindi या फिर inspirational stories in hindi में read करें और बच्चों को सुनाय भी और पढाएं भी आपको short stories in hindi जरुर पसंद आयंगी.


                             कहानी 1 :- खरगोश और कछुए की कहानी

एक बार की बात है एक खरगोश और कछुआ कही जा रहे थे और अचानक से आपस में मिल गए और दोनों में खूब बातें हुई हसी मजाक हुई और तभी आपस में दोनों की हार जीत को लेकर बेहेस होने लगी तो खरगोश ने कहा की एक race करते है और जो सबसे पहले पहाड़ी के दुसरी तरफ पहुंचेगा वो जीत जायगा और तभी फैसला हो जाएगा की कौन किस से कम है क्यूंकि खरगोश बहुत चालक था उसने सोचा की में तो जल्दी से दौड़ के भाग जाऊंगा और ये कछुआ तो अपनी धीमी-धीमी चाल से कहा मुझसे जीत पाएगा तो दोनों की race start होती है की खरगोश आगे निकल जाता है और वह थक जाता है वह सोचता है की में तो बहुत आगे निकल आया हूँ थोड़ा आराम कर लेता हूँ तो एक पेड़ की छाया में लेट जाता है आराम करते-करते उसको नींद आ जाती है वह सोचता है की थोड़ा सो लेता हूँ कछुआ तो अभी बहुत दूर है और आसानी से उसको में हर दूंगा खरगोश सो जाता है और वह जब तक उठता है की वह देखता है कछुआ finishing line तक पहुँच गया है जब तक खरगोश तेजी से भागते हुए आता है इतने में कछुआ line cross कर लेता है और वह जीत जाता है.
aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa


इस कहानी से हमे सीख मिलती है की ज्यादा over confident नहीं होना चाहिए कभी इससे हमे ही नुक्सान हो सकता है और न ही किसी को किसी से कम समझना चाहिए. अगर लगातार जीतना है तो आपको team में काम करना होगा और सीखना होगा, आपको अपनी काबीलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा.
एक बात का और ध्यान दीजिये की जब कभी आप फैल हों तो या तो ज्यादा मेहनत कीजिये या फिर अपनी planing को chnage करिए या फिर दोनों ही कर सकते है , पर कभी भी हार को आखिरी मान कर मत बैठ जाइए उससे लड़िये दरिये नहीं बड़ी से बड़ी हार के बाद भी जीता जा सकता है!

                                 कहानी 2 :-किसान और सारस 

एक किसान बगुलों से बहुत तंग आ गया था उसके खेत जंगल के पास था किसान जैसे ही बीज बो कर अपने घर जाता वेसे ही सरे पक्षी अपने झुंड के साथ आते और मट्टी कुरेद-कुरेदकर बोये हुए बीजो को खा जाते. किसान पक्षियों को उड़ाते-उड़ाते थक चूका था और फिरसे उसे खेत को दुबारा से जोतना पड़ता और इसी वजह से किसान बहुत ज्यादा परेशान हो गया था एक दिन उसने सोचा क्यूँ ना एक जाल बिछा दूँ और उसने ऐसा ही किया खेत पे उसने जाल बिछा दिया और इस बार फिर से उस खेत में पक्षी आए और उस जाल में फँस गए और इस बार एक सारस पक्षी भी उस जाल में फँस गया.

और जब किसान ने उस पक्षियों को पकने गया तो एक सारस भी पकड़ा गया और तभी वह सारस बोला की मुझे माफ़ करिये दया करिए मुझपे मैंने आपका कोई नुख्सान नहीं किया है. में तो सारस हूँ खेती को हानी पहुँचाने वाले कीड़ों को में खा जाता हूँ मुझे छोड़ दीजिये.
लेकिन किसान बहुत ही गुस्से में था. वह बोला! - 'तुम कहते हो मुझे माफ़ करो मेने कुछ नहीं किया है और आज तुम उन्ही चिड़ियों के साथ मिलकर मेरे खेत के सारे बीज को खा गए हो अब जब तुमने भी ऐसा किया है तो तुम भी दंड भुगतो'.
इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलती है की हम जैसी सांगत में रहते है वेसे ही बन जाते है.

                                 कहानी 3:- प्यासी चींटी और कबूतर 


एक दिन की बात है गर्मियों का मौसम था एक प्यासी चींटी पानी की तलाश कर रही थी कुछ देर इधर-उधर पानी के लिए भटकती रही लेकिन पानी नहीं मिला और वह चली गई और तभी उसे एक नदी दिखाई दि चींटी उस नदी के पास पहुंची लेकिन पानी पीने के लिए वह सीधे नदी में नहीं जा सकती थी इस वजह से वह एक पत्थर पर चढ़ गई और पानी पीने की कोशिश कर रही थी की वह नदी में ही गिर गई उस नदी के पास एक पेड़ था जहाँ एक कबूतर पेड़ की टेहनी में बैठा था और उसने उस चींटी को नदी में गिरते हुए देख लिया और उसे तरस आ गया और उसने जल्दी से नदी में संघर्ष कर रही चींटी को बचने के एक पत्ता तोड़ा और उसकी ओर फेंका और चींटी जल्दी से उस पत्ते पर चढ़ गई और थोड़ी देर बाद पत्ता तैरता हुआ सुखी जमीन की तरफ आ

गया और चींटी ने उस सुखी जमीन पर छलांग लगाईं और बाच गई. फिर उसने उस पेड़ कली ओर उपर देखा और कबूतर को धन्येवाद किया फिर एक दिन एक शिकारी उस नदी किनारे पहुंचा और उसने उस कबूतर की ओर जाल बिछाया और उसने दाना दाल दिया और थोड़ी दूर जाकर छुप गया वह इस उम्मीद में था की कबूतर दाना लेने जरूर आएगा तभी में उस कबूतर को पकड़ लूँगा कबूतर जैसे ही दाना लेने आया की वह उस जाल में फँस गया और उस शिकारी ने कबूतर को पकड़ लिया वह चींटी जिसको कबूतर ने बचाया था उसने देख लिया की वह शिकारी कबूतर को ले जा रहा है  चींटी जल्दी से उस शिकारी के पास गई और उसकी एड़ी में जोर से काट लोया और शिकारी ने तुरंत जाल को छोडकर अपने पैर देखने लगा और इस तरह से कबूतर बच गया.

कर भला हो भला तो इस कहानी से हमे यही सीख मिलती है की जब हम किसी की मदद करते है तो उसका फल हमे जरूर मिलता है जैसे कबूतर ने बिना किसी स्वार्थ के चींटी की जान बचाई उसके फलस्वरूप मुश्किल समय में चींटी ने भी कबूतर की जान बचाई तो बिना किसी स्वार्थ के मदद जरूर करे चाहे वो किसी का भला करने से मदद करने से कभी पीछे न हटें.


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